
उज्जैन। चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर जलती चिता के पास बैठकर कथित तौर पर मानव मांस खाने का वीडियो वायरल होने के बाद जेल भेजा गया विवादित किन्नर अघोरी काली नंद गिरी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब उसे उज्जैन शहर से बाहर करने की मांग भी तेज हो गई है। अघोरी अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तांत्रिक विष्णुनाथ महाराज ने कहा है कि आगामी सिंहस्थ महाकुंभ की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए काली नंद गिरी को उज्जैन में रहने नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जल्द ही पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
विष्णुनाथ महाराज के अनुसार, काली नंद गिरी का अतीत भी विवादों से जुड़ा रहा है। उनका दावा है कि उसका मूल नाम अल्लूरी श्रीनिवास है और वह तेलंगाना-आंध्र प्रदेश क्षेत्र से जुड़ा रहा है। आरोप है कि उसने जेंडर चेंज कराने के बाद किन्नर के रूप में पहचान बनाई और बाद में सोशल मीडिया पर खुद को ‘लेडी अघोरी’ के रूप में प्रचारित करना शुरू किया।
विष्णुनाथ महाराज के अनुसार, काली नंद गिरी पर दक्षिण भारत में भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि उसने एक छात्रा को झांसे में लेकर उससे शादी की। इसके अलावा तांत्रिक अनुष्ठान और सिद्धि का झांसा देकर एक महिला से करीब 10 लाख रुपये की ठगी करने का भी आरोप है। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों को लेकर तेलंगाना में उसके खिलाफ पुलिस शिकायतें दर्ज हुई थीं और उसकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर जलती चिता के पास कथित तौर पर मांस खाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए काली नंद गिरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब अघोरी समाज और स्थानीय साधु-संतों की ओर से उसे उज्जैन की सीमा से बाहर करने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के मद्देनजर धार्मिक नगरी की छवि और आयोजन की मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रशासन को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
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