
नई दिल्ली । ब्रिटेन (Britain) के डेवोन (Devon) क्षेत्र में स्थित द डॉन्की सैंक्चुअरी में रहने वाले लगभग 40 रेस्क्यू (Rescue) किए गए गधों (Donkeys) को इन विशेष कपड़ों से ढका जा रहा है। गर्मियों के मौसम में सक्रिय होने वाले काटने वाले कीड़े गधों की त्वचा पर गंभीर जलन, खुजली और घाव पैदा कर देते हैं। उम्रदराज और पहले से कमजोर गधों के लिए यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है, क्योंकि उनकी त्वचा सामान्य जानवरों की तुलना में धीरे-धीरे ठीक होती है। इसी चुनौती को देखते हुए संस्था ने सुरक्षा (Protection) देने का प्रभावी तरीका अपनाया।
संस्था के कर्मचारियों ने बताया कि गधों के लिए उपयोग किए जा रहे पायजामे, लेगिंग्स और अन्य ढीले परिधानों को उनके शरीर के अनुरूप तैयार किया जाता है। कपड़ों में आवश्यक बदलाव किए जाते हैं ताकि जानवरों को चलने, दौड़ने, चरने या आराम करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। इन परिधानों का मुख्य उद्देश्य गधों की त्वचा और काटने वाले कीड़ों के बीच एक सुरक्षित परत तैयार करना है, जिससे कीड़े सीधे त्वचा तक न पहुंच सकें और घाव बनने की संभावना कम हो जाए।
इस समाधान तक पहुंचने से पहले संस्था ने कई अन्य उपाय भी आजमाए थे। शुरुआती दौर में गधों के पैरों पर मोजे पहनाने का प्रयोग किया गया, लेकिन खुले मैदान में घूमते समय वे बार-बार उतर जाते थे। इसके बाद कर्मचारियों ने बड़े आकार के पायजामे, मैटरनिटी ट्राउजर और लेगिंग्स का उपयोग करना शुरू किया। यह प्रयोग सफल रहा, क्योंकि ये कपड़े अधिक देर तक अपनी जगह बने रहते हैं और जानवरों की सामान्य गतिविधियों में बाधा भी नहीं डालते।
संस्था ने गधों के लिए तैयार किए गए विशेष परिधानों को ‘डॉन-गेरी’ नाम दिया है। यह नाम डॉन्की और डंगरी शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। हल्के और आरामदायक कपड़े से तैयार किए गए ये परिधान लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करते हैं। संस्था का मानना है कि यह तरीका केवल कीटरोधी स्प्रे पर निर्भर रहने की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो रहा है, क्योंकि स्प्रे को बार-बार लगाना पड़ता है, जबकि कपड़े लगातार सुरक्षा देते रहते हैं।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण संरक्षण भी है। संस्था लोगों से पुराने और बड़े आकार के पायजामे, लेगिंग्स तथा ट्राउजर दान करने की अपील कर रही है। जिन कपड़ों का उपयोग लोग अब नहीं करते, उन्हें संशोधित कर गधों के लिए उपयोगी सुरक्षा परिधान बनाया जा रहा है। इससे कपड़ों का पुनः उपयोग बढ़ रहा है और अनावश्यक वस्त्र कचरे में जाने से भी बच रहे हैं।
इस अभियान को स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज का भी सहयोग मिला है। विश्वविद्यालय की री-यूज शॉप के माध्यम से ऐसे कपड़े उपलब्ध कराए गए, जिन्हें दोबारा बिक्री के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था। इन कपड़ों को डेवोन भेजकर गधों की सुरक्षा के लिए विशेष परिधानों में बदला गया। पशु संरक्षण, संसाधनों के पुनः उपयोग और मानवीय संवेदनशीलता को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल दिखाती है कि साधारण और व्यावहारिक सोच भी बड़े बदलाव का माध्यम बन सकती है। आज यह प्रयोग न केवल गधों को राहत दे रहा है, बल्कि पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में भी सामने आ रहा है।
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