
इन्दौर। सर्व मराठी भाषी संघ (All-Marathi Speakers’ Association) के तत्वावधान में शनिवार को इंदौर (Indore) के इतिहास (history) की सबसे भव्य एवं ऐतिहासिक दिंडी यात्रा (Dindi Yatra) राजबाड़ा से प्रारंभ होकर पंढरीनाथ मंदिर (हरसिद्धि चौराहा) तक निकली। इस भव्य यात्रा में 10 हजार से अधिक मराठी भाषी श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर मराठी संस्कृति, परंपरा और भगवान श्री हरि वि_ल के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का परिचय दिया। पूरे मार्ग पर ‘श्री हरि वि_ल’ के जयघोष, भजन-कीर्तन, ढोल-ताशे, लेझिम और पारंपरिक वाद्यों की गूंज से पूरा इंदौर भक्तिमय वातावरण में रंग गया।
आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। लगभग 40 वर्षों से इंदौर में अलग-अलग निकल रही 7 दिंडियों को पहली बार एक मंच पर लाया गया, जिससे मराठी समाज की अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली। आयोजन का प्रमुख आकर्षण मातोश्री अहिल्याबाई होलकर को समर्पित भव्य पालकी यात्रा रही। लगभग 252 वर्षों पूर्व मातोश्री अहिल्याबाई होल्कर के शासनकाल में निकाली जाने वाली पारंपरिक यात्रा के स्वरूप को एक बार फिर इंदौर में जीवंत किया गया। श्रद्धालुओं ने ध्वज के साथ मातोश्री की प्रतिमा को साक्षी मानकर ऐतिहासिक यात्रा में सहभागिता की। इसे मध्यप्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी दिंडी यात्रा माना जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा में पारंपरिक मराठी वेशभूषा, भगवा ध्वज, बैलगाडिय़ां, लेझिम, ढोल-ताशे, पारंपरिक वाद्य, लोकनृत्य, भजन-कीर्तन और विठ्ठल नाम संकीर्तन ने महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भव्य झलक प्रस्तुत की। यह आयोजन 800 वर्षों से चली आ रही मराठी गौरव और वारकरी संस्कृति की परंपरा का अद्भुत संगम बनकर सामने आया।
सिलिकॉन सिटी में दिखा पंढरपुर का नजारा
शहर के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित सिलिकॉन सिटी में भगवान विठ्ठल रुक्मिणी की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। क्षेत्र में दिंडी यात्रा के आयोजन का यह चौथा वर्ष था। पालकी यात्रा सिलिकॉन सिटी के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण के पश्चात निर्माणाधीन मंदिर परिसर में समापन हुआ। महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों में पाउल भजन, फुगड़ी नृत्य करते हुए शामिल हुईं। तरुण मंच के युवा पाउल भजन कर, तो पुरुष हाथ में भगवा ध्वज लेकर शामिल हुए।
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