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हांगकांग में जंगली सूअरों के खिलाफ सख्त अभियान, चार साल में आधी हुई आबादी; जानिए क्यों बदली सरकार की नीति

July 28, 2026

नई दिल्ली। हांगकांग में जंगली सूअरों (Hong Kong, wild boars) और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। रिहायशी इलाकों में लगातार बढ़ती घुसपैठ और लोगों पर हमलों की घटनाओं के बाद प्रशासन ने वर्ष 2021 में अपनी पुरानी नीति बदलते हुए जंगली सूअरों को पकड़कर मारने का अभियान शुरू किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के बाद चार वर्षों में जंगली सूअरों की आबादी में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है।

पहले नसबंदी और पुनर्वास की थी नीति

रिपोर्टों के अनुसार, नवंबर 2021 से पहले हांगकांग प्रशासन जंगली सूअरों को पकड़कर उनकी नसबंदी करता था और फिर उन्हें जंगल में छोड़ देता था। लेकिन समय के साथ सूअरों का रिहायशी क्षेत्रों में आना और लोगों पर हमले बढ़ने लगे, जिससे सरकार ने अपनी रणनीति बदल दी।



  • पुलिस अधिकारी पर हमले के बाद लिया गया बड़ा फैसला

    नीति में बदलाव की सबसे बड़ी वजह टिन हाऊ (Tin Hau) इलाके में हुई एक घटना मानी जाती है। यहां एक घायल जंगली सूअर को नियंत्रित करने की कोशिश के दौरान उसने एक सहायक पुलिस अधिकारी पर हमला कर दिया, जिससे अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के दौरान सूअर की भी ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो गई। इसके बाद सरकार ने जंगली सूअरों से निपटने के लिए अधिक सख्त नीति लागू कर दी।

    ‘पकड़ो और मारो’ अभियान शुरू

    नई नीति के तहत वन्यजीव कर्मी ट्रैंक्विलाइज़र गन की मदद से जंगली सूअरों को बेहोश कर पकड़ते हैं और बाद में उन्हें मार दिया जाता है। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य रिहायशी इलाकों में मानव सुरक्षा सुनिश्चित करना और जंगली सूअरों से होने वाली घटनाओं को कम करना है।

    चार साल में आबादी आधी रह गई

    लेजिस्लेटिव काउंसिल की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान पर पिछले चार वर्षों में लगभग 10.56 करोड़ हांगकांग डॉलर खर्च किए गए। वर्ष 2021 में जहां हांगकांग में जंगली सूअरों की अनुमानित संख्या करीब 2,000 थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 990 रह गई है। यानी उनकी आबादी में करीब 50.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

    पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

    सरकार की इस नीति का पर्यावरण विशेषज्ञों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध भी किया है। उनका कहना है कि जंगली सूअर पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और बड़े पैमाने पर उन्हें मारने से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पूरी आबादी खत्म करने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उनकी संख्या नियंत्रित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    मानव सुरक्षा बनाम वन्यजीव संरक्षण की बहस

    हांगकांग का यह मामला एक बार फिर उस बहस को सामने लाया है जिसमें एक ओर नागरिकों की सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने की चुनौती। सरकार जहां सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, वहीं पर्यावरणविद संतुलित और दीर्घकालिक समाधान की मांग कर रहे हैं।

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