
नई दिल्ली । संसद (Parliament) की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने बांग्लादेश (Bangladesh) से भारत में होने वाली अवैध घुसपैठ (Illegal Infiltration) को अब भी गंभीर चिंता का विषय बताया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि दोनों देशों के बीच एक स्थायी संयुक्त तंत्र या संयुक्त कार्य समूह (Joint Task Force) का गठन किया जाए, जिससे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि और उनके प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सके। समिति का मानना है कि इस तरह का तंत्र लंबित मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में हजारों ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें संदिग्ध व्यक्तियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि होना बाकी है। समिति का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच नियमित समन्वय की व्यवस्था बनाई जाती है तो इन मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और कानूनी प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेगी। साथ ही सीमा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
समिति ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी कार्रवाई के दौरान पूरी सावधानी बरती जानी चाहिए ताकि किसी भारतीय नागरिक को गलती से विदेशी नागरिक मानकर प्रत्यावर्तित न किया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिरासत में रखे गए सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए तथा प्रत्येक मामले में कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ को अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण बताया गया है। समिति के अनुसार सीमा से जुड़े इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही सीमा पर निगरानी, पहचान प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
समिति ने व्यापार से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ विदेशी उत्पाद बांग्लादेश के माध्यम से व्यापारिक रियायतों का लाभ उठाकर भारतीय बाजार तक पहुंच रहे हैं, जिससे घरेलू उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए व्यापार नियमों को और सख्त बनाने तथा भविष्य के व्यापार समझौतों में आवश्यक सुरक्षा प्रावधान शामिल करने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा समिति ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों को भी मजबूत करने पर बल दिया है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि साहित्य, कला, फिल्म, युवा आदान-प्रदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आपसी विश्वास को और मजबूत किया जाए। सीमावर्ती राज्यों की भागीदारी बढ़ाकर दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग को नई गति दी जा सकती है।
वीजा सेवाओं को लेकर भी समिति ने सुझाव दिया है कि परिस्थितियां सामान्य होने पर दोनों देशों के बीच वीजा व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से सामान्य बनाया जाए। साथ ही ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे वास्तविक यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों और अन्य वैध आवेदकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत-बांग्लादेश सीमा के अधिकांश हिस्से पर बाड़ लगाई जा चुकी है, जबकि कुछ हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियों और नदी क्षेत्रों के कारण यह कार्य अभी शेष है। समिति ने सीमा सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने तथा दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि सुरक्षा, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
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