
नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi)के जंतर मंतर(Jantar Manta) पर हुए विवादित प्रदर्शन(controversial protest) को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियां(Investigative agencies) अब इस पूरे मामले में कथित विदेशी फंडिंग डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच के आधार पर पांच से अधिक कंपनियां एजेंसियों के रडार पर बताई जा रही हैं। इनमें कुछ ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जो डिजिटल मार्केटिंग सोशल मीडिया कैंपेन और इंफ्लूएंसर मैनेजमेंट से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के लिए धन किस माध्यम से जुटाया गया और उसका इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।
सूत्रों के अनुसार बीते तीन दिनों के दौरान दिल्ली गुरुग्राम मुंबई और बेंगलुरु स्थित कई कार्यालयों और परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज डिजिटल कैंपेन का रिकॉर्ड सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के साथ हुए समझौते और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की गई। एजेंसियों ने कई डिजिटल उपकरण भी अपने कब्जे में लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।
जांच में कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन लेनदेन के माध्यम से सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के प्रचार अभियान चलाए गए हो सकते हैं। इसी कारण कई सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर भी जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या किसी प्रकार के भुगतान के बदले सोशल मीडिया पर विशेष अभियान संचालित किए गए थे। जांच पूरी होने और पर्याप्त दस्तावेजी तथा डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में करीब दो हजार संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान किए जाने का दावा किया गया है। इनमें से कई अकाउंट विदेशों से संचालित बताए जा रहे हैं जबकि लगभग सात सौ अकाउंट भारत से सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। जांच का फोकस इन खातों के संचालन भुगतान और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने पर भी है ताकि पूरे डिजिटल नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट की जा सके।
इसी बीच पश्चिम बंगाल एसटीएफ की जांच में गिरफ्तार जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल से जुड़े मामले ने भी जांच को नया आयाम दिया है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि उसने कथित रूप से जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़फोड़ करने की साजिश रची थी। साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाने की योजना होने की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
इसके अलावा कई यूट्यूबर और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर भी जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रदर्शन और उससे जुड़े डिजिटल प्रचार अभियान में उनकी भूमिका क्या थी और क्या किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या संगठित अभियान चलाया गया था। फिलहाल एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक मामले की विस्तृत पड़ताल जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों में किसकी क्या भूमिका रही।
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