कोलकाता। 2029 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) से काफी पहले विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। इसी कड़ी में डीएमके सांसद कनिमोई करुणानिधि (Kanimozhi Karunanidhi) ने गुरुवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से मुलाकात की। इसके बाद कांग्रेस से अलग क्षेत्रीय दलों को साथ लाकर नए राजनीतिक मोर्चे की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, डीएमके या टीएमसी की ओर से किसी नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
कनिमोई ने कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर उनसे मुलाकात की। यह बैठक करीब डेढ़ घंटे चली। इससे पहले कनिमोई की शिवसेना (UVT) प्रमुख उद्धव ठाकरे तथा एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले समेत अन्य क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात की खबरें सामने आई थीं। इन बैठकों को क्षेत्रीय दलों के बीच संभावित समन्वय की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस के बिना तीसरे मोर्चे की चर्चा
रिपोर्टों के मुताबिक डीएमके के एक नेता ने कांग्रेस के बिना तीसरे मोर्चे की संभावनाएं तलाशने की बात कही है। हालांकि, यह पार्टी की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं है।
एक टीएमसी नेता ने भी कहा कि ममता बनर्जी के डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के साथ अच्छे संबंध हैं और वह गैर-एनडीए दलों तथा विपक्षी खेमे के विभिन्न नेताओं के संपर्क में रहती हैं। हालांकि, उन्होंने कनिमोई के साथ हुई बैठक के अलावा किसी अन्य राजनीतिक समझौते को लेकर अटकलों से बचने की बात कही।
उद्धव ठाकरे और सुप्रिया सुले से भी मुलाकात
कनिमोई की ममता बनर्जी से मुलाकात से पहले क्षेत्रीय राजनीति के कई प्रमुख नेताओं के साथ उनकी बैठकें हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। इसके बाद एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले से भी उनकी बातचीत हुई।
इन बैठकों में क्षेत्रीय दलों के बीच सहयोग और संसद में परिसीमन जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन मुलाकातों को किसी नए गठबंधन की अंतिम रूपरेखा के तौर पर पेश नहीं किया गया है।
तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस संबंधों में बदलाव
इस राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के संबंधों में आया बदलाव भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के मुताबिक 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ा। कांग्रेस के डीएमके से अलग होकर तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) के साथ जाने के बाद डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बनाई।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि डीएमके ने जून में हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि, इन घटनाक्रमों के बावजूद भविष्य के राष्ट्रीय गठबंधन को लेकर अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों को लेकर टीएमसी और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव मैदान में हैं। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं। इसी बीच ऐसी खबरें सामने आई थीं कि टीएमसी ने कांग्रेस के साथ सीटों को लेकर संभावित समझ की कोशिश की थी।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि टीएमसी ने नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और रेजीनगर से खुद चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। टीएमसी की ओर से इस तरह के प्रस्ताव से इनकार किया गया। इसलिए इस मुद्दे पर दोनों दलों के दावों में अंतर बना हुआ है।
तीसरे मोर्चे की कोशिश नई नहीं
कांग्रेस और भाजपा से अलग क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं। 2013 में ममता बनर्जी ने ऐसा राजनीतिक मंच बनाने की पहल की थी। इसके बाद 2018 में तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल की ओर से भी विपक्षी दलों के बीच व्यापक राजनीतिक समन्वय की कोशिशें हुई थीं।
फिलहाल कनिमोई और ममता बनर्जी की मुलाकात तथा अन्य क्षेत्रीय नेताओं के साथ डीएमके की बातचीत ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा जरूर तेज कर दी है, लेकिन कांग्रेस से अलग किसी नए राष्ट्रीय गठबंधन के गठन पर अभी कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
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