
नई दिल्ली। खगोल विज्ञान (Astronomy)की दुनिया में वैज्ञानिकों (Scientists)को एक ऐसी खोज मिली है जिसने ग्रहों के निर्माण को लेकर मौजूदा समझ के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वैज्ञानिकों ने एलियास(Scientists Elias) 2-24 बी नाम के एक बेहद युवा ग्रह की पुष्टि की है। इसकी उम्र 10 लाख साल से भी कम मानी जा रही है। खास बात यह है कि यह ग्रह आकार में करीब बृहस्पति जितना विशाल है और अपने तारे से पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से करीब 55 गुना ज्यादा दूर स्थित है। इतनी कम उम्र में इतनी दूर एक विशाल गैसीय ग्रह का मौजूद होना वैज्ञानिकों के लिए किसी पहेली से कम नहीं है।
एलियास 2-24 बी जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है वह खुद भी बेहद युवा है। उसके चारों तरफ गैस धूल बर्फ और चट्टानी पदार्थ से बनी एक विशाल डिस्क मौजूद है। आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहों का निर्माण इसी तरह की डिस्क से होता है। समय के साथ इसमें मौजूद छोटे कण और चट्टानी टुकड़े आपस में जुड़ते हैं। धीरे धीरे बड़े पिंड बनते हैं और फिर वे अपने आसपास मौजूद पदार्थ को खींचकर ग्रह का आकार लेना शुरू करते हैं। लेकिन एलियास 2-24 बी की उम्र को देखते हुए इसकी मौजूदगी इस प्रक्रिया को लेकर वैज्ञानिकों के लिए कई नए सवाल खड़े कर रही है।
इस ग्रह का सुराग पहली बार तब मिला जब चिली में मौजूद एएलएमए वेधशाला ने एलियास 2-24 के आसपास मौजूद धूल और गैस की डिस्क में एक बड़ा गैप देखा। इसके बाद यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के वेरी लार्ज टेलीस्कोप ने इसी क्षेत्र में बेहद कमजोर रोशनी का एक बिंदु दर्ज किया। हालांकि उस समय यह तय नहीं हो पाया था कि वह वास्तव में ग्रह है या फिर दूर मौजूद किसी दूसरे तारे की रोशनी। इस रहस्य को सुलझाने में वैज्ञानिकों को कई साल लग गए।
शोधकर्ताओं ने बाद में पुराने आंकड़ों की भी जांच की। नासा की ओर से वित्तपोषित केक वेधशाला के 2018 और 2020 के अवलोकनों में इसी वस्तु को दर्ज किया गया था। दोनों समय उसकी स्थिति की तुलना करने पर पता चला कि वह एलियास 2-24 के साथ ही गति कर रही थी। इससे इस बात की पुष्टि करने में मदद मिली कि यह कोई दूर का पृष्ठभूमि तारा नहीं बल्कि एलियास 2-24 की परिक्रमा करने वाला ग्रह है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एलियास 2-24 बी इतनी जल्दी बना कैसे। वैज्ञानिक मॉडलों के मुताबिक बृहस्पति जैसे विशाल ग्रह को बनने में लाखों साल लग सकते हैं। सूर्य से बृहस्पति जितनी दूरी के आसपास किसी विशाल ग्रह के बनने में करीब 50 लाख साल लगने का अनुमान लगाया जाता है। वहीं एलियास 2-24 बी इससे भी करीब 10 गुना ज्यादा दूर है और उसकी उम्र 10 लाख साल से कम है। यही अंतर मौजूदा ग्रह निर्माण मॉडल के सामने चुनौती पेश करता है।
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नवजात ग्रह आमतौर पर अपने जन्मस्थान की गैस और धूल के बीच छिपे रहते हैं। ऊपर से उनके युवा तारे की तेज रोशनी उनकी कमजोर चमक को दबा देती है। ऐसे में किसी ग्रह को उसके जन्म के इतने शुरुआती चरण में देख पाना बेहद दुर्लभ मौका माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि एलियास 2-24 बी का अध्ययन यह समझने में मदद करेगा कि गैस और धूल से विशाल ग्रह कितनी तेजी से बन सकते हैं। भविष्य में नासा का नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप ऐसे और युवा ग्रहों की खोज में मदद कर सकता है। इस तरह एलियास 2-24 बी सिर्फ एक नया ग्रह नहीं बल्कि ग्रहों के जन्म की प्रक्रिया को समझने के लिए एक अहम प्राकृतिक प्रयोगशाला बन सकता है।
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