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बच्चे कक्षा में, शिक्षक दफ्तरों में

August 03, 2026

  • खुलासों के बाद शिक्षा विभाग हरकत में, बिना अनुमति कार्यालय पहुंचे तो होगी कार्रवाई

जबलपुर। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के समय शिक्षकों की गैरमौजूदगी अब शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चिंता बन गई है। कई मामलों में सामने आया कि बच्चे स्कूल में बिना शिक्षक के बैठे रहे, जबकि शिक्षक अलग-अलग कामों के लिए स्कूल से बाहर थे। लगातार मिल रही शिकायतों और हालिया घटनाओं के बाद जिला शिक्षा केंद्र ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी कर दिया है कि अब शाला समय में कोई भी शिक्षक जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय में दिखाई नहीं देना चाहिए। आदेश का उल्लंघन करने वालों का वेतन रोकने तक की चेतावनी दी गई है।


  • एक स्कूल की घटना ने खोली व्यवस्था की पोल
    कुछ दिन पहले जिले के एक सरकारी स्कूल में निरीक्षण के दौरान पूरा विद्यालय बिना शिक्षक के मिला था। कक्षाओं में बच्चे मौजूद थे, लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं था। जांच में सामने आया कि स्कूल प्रभारी बिजली विभाग गए थे, एक शिक्षिका परीक्षा ड्यूटी पर थीं और दूसरी एक अनुपस्थित छात्र के घर गई थीं। हालांकि सभी के पास अपने-अपने कारण थे, लेकिन सवाल यह उठा कि आखिर बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

    वेतन रोकने की चेतावनी
    आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शाला समय में बिना अनुमति कार्यालय आने वाले शिक्षकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक होने पर वेतन भी रोका जा सकता है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अध्यापन समय में शिक्षक स्कूलों में ही मौजूद रहें और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

    140 नए शिक्षकों की मिली पदस्थापना
    इसी बीच जिले को प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए नई सौगात भी मिली है। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित शिक्षक चयन परीक्षा में चयनित 140 प्राथमिक शिक्षकों की जबलपुर जिले में पदस्थापना की गई है। विभाग को उम्मीद है कि नए शिक्षकों के आने से विद्यालयों में रिक्त पदों की समस्या कुछ हद तक कम होगी और शिक्षण व्यवस्था बेहतर होगी।

    बार-बार दोहराई जा रही थी यही स्थिति
    शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार यह समस्या किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं है। कई स्कूलों में शिक्षक कार्यालयी काम, बैठकों या अन्य कारणों से शाला समय में अनुपस्थित रहते हैं, जिससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं।जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार जिले के सभी शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी विद्यालयों के शिक्षकों को शाला समय में कार्यालय आने पर रोक लगा दी गई है। यदि किसी अत्यावश्यक कार्य से कार्यालय आना हो तो संबंधित संकुल प्राचार्य द्वारा प्रमाणित आवेदन प्रस्तुत करने के बाद ही उपस्थिति मान्य होगी।

     

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