
शांतिकुंज, हरिद्वार के महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती शैफाली पंड्या अपना उद्बोधन देती हुईं।
मुंबई के बोरीवली में अखिल विश्व गायत्री परिवार ने गुरुपूर्णिमा पर महाशक्ति की लोकयात्रा का आयोजन किया। कार्यक्रम में गुरु परंपरा, नारी सशक्तिकरण और संस्कार निर्माण का संदेश दिया गया।

मुंबई (महाराष्ट्र). गुरुपूर्णिमा (Guru Purnima) के पावन अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार (Akhil Vishwa Gayatri Parivar) द्वारा मुंबई (Mumbai) के बोरीवली स्थित प्रबोधनकर ठाकरे सभागार में ‘महाशक्ति की लोकयात्रा’ (Mahashakti Ki Lokyatra) कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। आध्यात्मिक चेतना, गुरु परंपरा, नारी सशक्तिकरण और संस्कार निर्माण पर केंद्रित इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं, गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ शांतिकुंज, हरिद्वार के महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती शैफाली पंड्या की गरिमामयी उपस्थिति और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद परम वंदनीया श्रीमती भगवती देवी शर्मा (माताजी) के जीवन, व्यक्तित्व और समाज निर्माण में उनके योगदान पर आधारित एक प्रेरणादायी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। फिल्म के माध्यम से उपस्थित लोगों को माताजी के त्याग, सेवा, आध्यात्मिक साधना और महिला जागरण के लिए किए गए कार्यों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे भावपूर्ण और प्रेरक प्रस्तुति बताया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया। पार्श्व गायिका ईशिता विश्वकर्मा ने प्रज्ञा गीतों और भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु भावविभोर दिखाई दिए। संगीत के माध्यम से गुरु परंपरा, राष्ट्र निर्माण और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर गायत्री परिवार के बच्चों ने नशा मुक्ति एवं व्यसन उन्मूलन विषय पर एक प्रभावशाली लघु नाटक प्रस्तुत किया। नाटक में युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। बाल कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अलावा बाल संस्कारशाला के बच्चों ने गुरु वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद अपने मुख्य उद्बोधन में श्रीमती शैफाली पंड्या ने कहा कि गुरुपूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मानुशासन, आत्मविश्लेषण और ज्ञान के प्रति समर्पण का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला प्रकाश-स्तंभ माना गया है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यास पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर हमें उन महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए जिन्होंने अपने तप, त्याग और साधना से समाज को नई दिशा दी। गुरु का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आध्यात्मिक मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों को अपनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
अपने संबोधन में उन्होंने परम वंदनीया भगवती देवी शर्मा (माताजी) के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग चार दशक पहले उन्होंने नारी जागरण और महिला सशक्तिकरण का जो अभियान प्रारंभ किया था, वह आज एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। उसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार वर्ष 2026 को ‘नारी सशक्तिकरण वर्ष’ के रूप में मना रहा है। इस अभियान के तहत देश और विदेश में महिलाओं के नेतृत्व विकास, परिवार निर्माण, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समाज के समग्र विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि परिवार की महिलाएं शिक्षित, संस्कारित और आत्मनिर्भर हों तो पूरा समाज सशक्त बनता है। गायत्री परिवार इसी सोच के साथ महिला जागरण और सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न अभियानों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम के समापन सत्र में बोरीवली एवं दहिसर क्षेत्र की विधायक श्रीमती मनीषा ताई ने गायत्री परिवार द्वारा वर्षों से किए जा रहे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संगठन व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और नैतिक मूल्यों के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऐसे प्रयास समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में गायत्री मंत्र की महत्ता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका नियमित जप व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक सोच प्रदान करता है। उनके अनुसार, भारतीय संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार के आयोजन समय की आवश्यकता हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की और सामाजिक समरसता, संस्कार निर्माण तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन स्थल पर अनुशासन, सेवा और सामूहिक सहभागिता का वातावरण देखने को मिला। विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
आयोजकों के अनुसार, गुरुपूर्णिमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज में नैतिकता, सेवा, सद्भाव और आत्मविकास की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। गायत्री परिवार देशभर में समय-समय पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, महिला सशक्तिकरण और युवा
जागरण जैसे विषयों पर जनजागरण अभियान चलाता रहा है। ‘महाशक्ति की लोकयात्रा’ भी इसी व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के आदर्शों का अनुसरण करने, समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी निभाने और नशामुक्त, संस्कारित तथा सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया। हजारों लोगों की उपस्थिति और उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इस आयोजन को गुरुपूर्णिमा के अवसर पर मुंबई के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में शामिल कर दिया।
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