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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

August 04, 2026

एमआईसी मेम्बर को चढ़ा रील बनाने का बुखार
भाजपा की परिषद के एक वरिष्ठ एमआईसी मेम्बर को इन दिनों रील बनाने का बुखार चढ़ा है। नेताजी जहां जाते हैं वहां रील बनाने वाले को साथ लेकर जाते हैं और फिर होती है रील में एडिटिंग, जो कोई और करता है। बस फिर क्या है, नेताजी के सोशल मीडिया अकाउंट पर रील दौड़ने लगती है। नेताजी यह बताने से नहीं चूकते कि उन्होंने आज क्या किया और अपनी उपलब्धियों का बखान खुद अपने मुंह से करते हैं। खैर, नेताजी को सपने तो अपनी विधानसभा चुनाव से लड़ने के भी आ रहे हैं, लेकिन उनके सामने उनसे कई वरिष्ठ कतार में हैं, फिर भी नेताजी मान नहीं रहे हैं। अगर आप अभी भी नहीं समझे तो आपको इशारों में बता दें कि ये वही नेताजी हैं, जिनका विभाग कुछ दिनों पहले चर्चा में रहा है। कहने वाले तो कह रहे हैं कि नेताजी रील से बाहर रियल में भी जरा शहर में एक बार घूम लें तो मालूम चले कि उनके मातहत क्या कर रहे हैं? और जिसकी वे वाहवाही लूट रहे हैं वे काम हो भी रहे हैं या नहीं?


  • …और वायरल हो गया फर्जी लेटर
    दतिया उपचुनाव की चारों ओर चर्चा रही, लेकिन मतदान वाले दिन एक लेटर ने सबका ध्यान खींच डाला। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नाम से जारी इस लेटर में दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीरसिंह कुशवाह को पार्टी से निकालने का आदेश था। बस फिर क्या था, चर्चा चल पड़ी कि भाजपा किसी को छोड़ती नहीं है, लेकिन थोड़ी ही देर में बिना तारीख वाले इस लेटर का खंडन भी सामने आया और मालूम चला कि किसी ने यह फर्जी लेटर जारी कर दिया था, जिससे थोड़े समय के लिए ही सही, पार्टी में हड़बड़ी मच गई।

    पार्षद के घर में लग गई सरकारी मोटर
    कांग्रेस की एक महिला पार्षद हैं, जो राऊ विधानसभा की शहरी सीमा से आती हैं। मैडम के पति कुछ ज्यादा ही जुगाड़ू हैं और नेताओं के मुंह लगे हुए हैं। बोलने में मुंहफट हैं, इसलिए कोई उनसे बहस भी नहीं करता है। यही नहीं, उनका पुत्र भी अपने आपको किसी पार्षद से कम नहीं आंकता। तीनों मिलकर लोगों को पलीता लगा रहे हैं। मकानों को नोटिस दिलवाने के साथ-साथ ताजा मामला वहां के लोग बता रहे हैं कि पार्षद पति का मकान बन रहा है और उन्होंने सरकारी बोरिंग की मोटर निकालकर अपने यहां लगवा ली है। इस तरह की जुगाड़ पार्षद पति करते रहते हैं और बोलने वाले भी कुछ नहीं कह पाते, क्योंकि जो बोलता है उसके खिलाफ बड़े नेताओं के कान भर दिए जाते हैं।

    रीना की कहीं हैं निगाहें और कहीं है निशाना
    प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रीना बौरासी को पिछले चुनाव में तुलसी सिलावट से हार का सामना करना पड़ा था। कहा जा रहा है कि इस बार फिर तुलसी सिलावट मैदान पकड़ सकते हैं। वैसे दिग्गी ने यह कहकर सांवेर विधानसभा में बवाल मचा दिया कि सावन सोनकर सांवेर से तैयारी करें। दिग्गी की इस बात के कई मायने निकाले जा रहे हैं, लेकिन सावन ने सांवेर का आंगन नहीं छोड़ा है और वे लगातार वहां जाते रहे हैं। अब बात करें रीना बौरासी की तो वे फिलहाल कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना लगा रही हैं। कांग्रेस की राजनीति को जानने वाले कह रहे हैं कि रीना सांवेर के बहाने आलोट जाकर नया दांव खेल सकती है। आलोट गुड्डू परिवार के लिए फायदेमंद रहा है और इसी का फायदा रीना उठाना चाहती हैं। हो सकता है कि वे आलोट से चुनाव लड़ लें।

    कांग्रेस को नहीं मिलती प्रोसिडिंग की कॉपी
    कांग्रेसियों की शिकायत है कि कलेक्टर कार्यालय में निर्वाचन संबंधी जो बैठक होती है, उसमें राजनीतिक सदस्यों द्वारा उठाए गए सवाल और अन्य मुद्दोंं की जानकारी कलेक्टर कार्यालय में नोट की जाती है, लेकिन उसकी कॉपी नहीं दी जाती है, आखिर ऐसा क्यों। पिछली बार की मीटिंग में कांग्रेस के एक सदस्य ने ये मुद्दा कलेक्टर शिवम वर्मा के सामने उठा दिया और पूछ डाला कि पहले तो सब मीटिंग की जानकारी मिलती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। कलेक्टर ने मातहतों को देखा और थोड़ी ही देन में उन्हें प्रोसेडिंग की कापी मिल गई।

    इस बार भी युवा मोर्चा 2 नंबर से नहीं होगा
    युवा मोर्चा को लेकर जो समीकरण बन रहे हैं, उससे लग रहा है कि इस बार भी युवा मोर्चा दो नंबर विधानसभा से तो नहीं आएगा। लंबे समय से यहां के युवा दयालु के भरोसे हैं और वे भाजपा की सबसे बड़ी विंग युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष बनना चाहते हैं, लेकिन जो हालात बने हैं, उससे लग रहा है कि इस बार का युवा मोर्चा पद किसी विधायक के खाते में तो जाता नहीं दिख रहा है। आने वाले दिनों में इसकी घोषणा होना है। इस पद के लिए एक नाम तेजी से उभरा था और लेन-देन तक की चर्चा चली थी, लेकिन उम्र ज्यादा होने के कारण यह पद उनके हाथ से भी जाता रहा।

    घर में ही लड़ लिए कांग्रेसी, कैसे संभालेंगे जीतू
    जीतू पटवारी लाख कोशिश कर लें, लेकिन कांग्रेस से गुटबाजी को समाप्त नहंी कर पा रहे हैं। कई बार तो वे खुद इसका शिकार हो जाते हैं। इसका उदाहरण उनकी हाल ही में हुई दिग्गी राजा से अनबन है। अब नेताजी खुद अपने ही घर में कांग्रेसियों को संभाल नहीं पा रहे हैं। दो दिन पहले जीतू पटवारी के घर शहर के कांग्रेसी नेताओं की बैठक हुई थी, लेकिन शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और तीन नंबर के प्रभारी पिंटू जोशी में किसी बात को लेकर अनबन हो गई और बहस बढ़ गई। कहा जा रहा हैकि चिंटू जिस स्टाइल में शहर कांग्रेस चला रहे हैं वह कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा है।

    कांग्रेस से भाजपा में आए नेताजी को इन दिनों रोज बयानबाजी करने का बुखार चढ़ा हुआ है। भाजपा नेताओं की नजर में चढ़ने के लिए वे रोज कुछ न कुछ प्रेसनोट जारी कर देते हैं, लेकिन उन्हें तवज्जो नहीं मिलती है। ये भाजपा है नेताजी और यहां पार्टी लाइन पर ही बयान जारी होते हैं न कि व्यक्तिगत -संजीव मालवीय

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