
नई दिल्ली। अगर किसी शहर को आसमान से देखने पर उसकी सड़कें और इमारतें (Roads and buildings) शतरंज की बिसात (Chessboard) जैसी नजर आएं, तो यह नजारा किसी फिल्मी कल्पना से कम नहीं होगा। स्पेन (Spain) का बार्सिलोना (Barcelona) ऐसा ही शहर है, जिसकी सुनियोजित सड़कें, एक जैसे ब्लॉक और 45 डिग्री पर कटे कोने इसे दुनिया के सबसे अनोखे शहरों में शामिल करते हैं।
बार्सिलोना के चौकोर ब्लॉक्स के कोने सामान्य 90 डिग्री के बजाय 45 डिग्री पर काटे गए हैं। इन्हें ऑक्टोगोनल ब्लॉक कहा जाता है। 1850 के दशक में इंजीनियर इल्डेफॉन्स सेर्डा ने शहर का यह मास्टर प्लान तैयार किया था। उस समय कारों का दौर शुरू भी नहीं हुआ था, लेकिन सेर्डा ने भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए ऐसा डिजाइन तैयार किया।
इन कटे हुए कोनों से चौराहों पर अतिरिक्त जगह बनी। इससे हवा के बेहतर आवागमन के साथ वाहनों को मोड़ने और दूसरी दिशा से आने वाले यातायात को देखने में भी सुविधा मिली।
भीड़ और बीमारियों से जूझ रहा था पुराना बार्सिलोना
19वीं सदी के मध्य में बार्सिलोना की स्थिति आज से बिल्कुल अलग थी। शहर मध्यकालीन दीवारों के भीतर बेहद घना हो चुका था। संकरी गलियों में धूप और हवा का पहुंचना मुश्किल था। गंदगी, प्रदूषण और हैजा जैसी महामारियों ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया था। उस दौर में लोगों की औसत उम्र करीब 30 से 35 वर्ष तक रह गई थी। ऐसे हालात में शहर की पुरानी दीवारों को गिराने का फैसला लिया गया और नए बार्सिलोना की योजना बनाने की जिम्मेदारी इल्डेफॉन्स सेर्डा को मिली।
हर व्यक्ति के लिए हवा, धूप और हरियाली
सेर्डा केवल इंजीनियर ही नहीं, बल्कि समाजवादी विचारक भी थे। उनका मानना था कि शहर में अमीर और गरीब सभी को ताजी हवा, पर्याप्त धूप और हरियाली मिलनी चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने शहर को एक जैसे आकार के ब्लॉक्स में बांटा।
उनकी मूल योजना में प्रत्येक ब्लॉक की सिर्फ दो या तीन तरफ इमारतें बनाने और बीच का हिस्सा बगीचे या सार्वजनिक स्थान के तौर पर खाली रखने का प्रस्ताव था। हालांकि, बाद में व्यावसायिक निर्माण के चलते इन आंतरिक हिस्सों में भी इमारतें खड़ी कर दी गईं।
सेर्डा की योजना में गौडी ने भरी कलात्मक जान
बार्सिलोना की पहचान को नई ऊंचाई देने में महान वास्तुकार एंतोनी गौडी की भी बड़ी भूमिका रही। सेर्डा ने शहर को व्यवस्थित और गणितीय ढांचा दिया, वहीं गौडी ने अपनी कल्पनाशील वास्तुकला से उसे कलात्मक पहचान दिलाई।
कैटलन मॉडर्निज्म के प्रमुख वास्तुकार गौडी प्रकृति से बेहद प्रभावित थे। उनकी इमारतों में घुमावदार आकृतियों और प्राकृतिक संरचनाओं की झलक मिलती है। कासा बात्लो की छत ड्रैगन की रीढ़ जैसी दिखाई देती है, जबकि कासा मिला की बालकनियां समुद्र की लहरों का अहसास कराती हैं।
शहर का सग्रादा फैमिलिया भी गौडी की अद्भुत वास्तुकला का उदाहरण है। इसके अंदर बने स्तंभ पेड़ों जैसे दिखाई देते हैं, जो वास्तुकला, प्रकृति और आध्यात्मिकता का अनूठा मेल प्रस्तुत करते हैं।
अब ‘सुपरब्लॉक’ से ट्रैफिक और प्रदूषण पर लगाम
आज बार्सिलोना की आबादी करीब 16.5 लाख है, जबकि पूरे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 55 लाख से अधिक लोग रहते हैं। हर साल एक करोड़ से ज्यादा पर्यटक यहां पहुंचते हैं। बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण से निपटने के लिए शहर अब सेर्डा की मूल सोच को आधुनिक रूप में लागू कर रहा है।
इसके तहत कई ब्लॉक्स को मिलाकर ‘सुपरब्लॉक’ बनाए जा रहे हैं। इनके अंदर वाहनों की आवाजाही सीमित कर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, पार्क और सामुदायिक गतिविधियों के लिए जगह बढ़ाई जा रही है। शहर में लागू इन उपायों से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) प्रदूषण के स्तर में 25 प्रतिशत तक कमी आने का दावा किया गया है।
पुरानी विरासत और आधुनिकता का संगम
बार्सिलोना में जहां 14वीं सदी के गॉथिक क्वार्टर की संकरी और ऐतिहासिक गलियां आज भी मौजूद हैं, वहीं आधुनिक वित्तीय इलाके में टॉरे ग्लोरीज जैसी भविष्यवादी गगनचुंबी इमारतें भी नजर आती हैं।
बार्सिलोना का शहरी ढांचा बताता है कि शहर सिर्फ इमारतों और सड़कों का समूह नहीं होता। बेहतर शहर वह है, जहां वास्तुकला के साथ लोगों की सुविधा, स्वच्छ हवा, हरियाली और मानसिक सुकून को भी महत्व दिया जाए। यही वजह है कि बार्सिलोना को आसमान से देखने पर उसकी सड़कें जहां गणितीय अनुशासन दिखाती हैं, वहीं जमीन पर उसकी वास्तुकला कला और कल्पना की कहानी सुनाती है।
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