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रावण की आत्मलिंग कथा से जुड़ा है यह शिवधाम, समुद्र किनारे 123 फीट प्रतिमा की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

August 09, 2026

नई दिल्ली । कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल तालुका में स्थित मुरुदेश्वर मंदिर(Murudeshwar Temple) भगवान शिव भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। अरब सागरअरब सागर (Arabian Sea) के तट पर कंदुका पहाड़ीकंदुका पहाड़ी (Kanduka Hill) पर बना यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी भव्य वास्तुकलाभव्य वास्तुकला (Architecture) और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है, जिससे इसका परिसर बेहद आकर्षक दिखाई देता है।

मुरुदेश्वर मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता का संबंध रावण और भगवान शिव से जुड़ी आत्मलिंग की कथा से बताया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे आत्मलिंग प्रदान किया था, लेकिन इसके साथ कुछ विशेष शर्तें जुड़ी थीं।

कथा के अनुसार, रावण आत्मलिंग को लेकर लंका जा रहा था। इसी दौरान देवताओं ने ऐसी परिस्थिति उत्पन्न की, जिसके कारण रावण आत्मलिंग को एक स्थान पर रख बैठा। इसके बाद वह उसे दोबारा उठा नहीं सका। धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि आत्मलिंग के कुछ हिस्से जिन स्थानों पर गिरे, उनमें मुरुदेश्वर भी शामिल है। इसी पौराणिक प्रसंग को मंदिर की धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है।

मंदिर परिसर की सबसे प्रमुख विशेषताओं में भगवान शिव की विशाल प्रतिमा शामिल है। खुले वातावरण में स्थापित यह प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में बनाई गई है और इसकी ऊंचाई 123 फीट बताई जाती है। समुद्र के किनारे स्थित होने के कारण दूर से भी यह प्रतिमा आसानी से दिखाई देती है। सूर्य की रोशनी में प्रतिमा का स्वरूप और आसपास का समुद्री दृश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

मुरुदेश्वर मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। परिसर में बना विशाल गोपुरम इसकी प्रमुख पहचान है। इसे राजा गोपुरा कहा जाता है और इसकी संरचना कई मंजिलों वाली है। श्रद्धालुओं के लिए इसकी ऊपरी मंजिल तक पहुंचने की सुविधा भी उपलब्ध है। वहां से मंदिर परिसर, विशाल शिव प्रतिमा और अरब सागर का विस्तृत दृश्य देखा जा सकता है।

मंदिर की संरचना और नक्काशी में दक्षिण भारतीय स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाई देती है। धार्मिक महत्व के साथ इसकी भौगोलिक स्थिति भी इसे विशेष बनाती है। समुद्र, पहाड़ी और मंदिर का संयोजन यहां आने वाले लोगों को एक अलग अनुभव देता है।


  • मुरुदेश्वर आज धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शिवरात्रि जैसे धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसके अलावा प्राकृतिक दृश्य और समुद्र तट भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

    इस तरह मुरुदेश्वर मंदिर धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथा, दक्षिण भारतीय स्थापत्य और समुद्री प्राकृतिक परिवेश का अनूठा मेल प्रस्तुत करता है। 123 फीट ऊंची शिव प्रतिमा इसकी पहचान को और विशिष्ट बनाती है, जबकि आत्मलिंग से जुड़ी पौराणिक कथा इस स्थान के धार्मिक महत्व को मजबूत करती है।

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