
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान(US and Iran) के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump)ने अब मुआवजे का मुद्दा उठाकर विवाद (dispute)को एक नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है तो अमेरिका भी उससे मुआवजा मांग सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनके इस रुख से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।\
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह विचार दिलचस्प लगा कि ईरान हालिया संघर्ष में हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। इसी आधार पर उन्होंने अमेरिका की ओर से भी ईरान से मुआवजा मांगने की बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान से जुड़े संघर्षों में कई अमेरिकी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि ऐसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।
अपने बयान में ट्रंप ने पुराने हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यमन के बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए घातक हमले का हवाला दिया। अक्टूबर 2000 में हुए इस हमले में 17 अमेरिकी नाविकों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी अलकायदा पर डाली गई थी। ट्रंप ने इसके अलावा जनरल कासिम सुलेमानी से जुड़े घटनाक्रम और दूसरे संघर्षों में मारे गए लोगों का भी जिक्र किया।
ट्रंप ने कहा कि पिछले कई दशकों के दौरान विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न संघर्षों में मारे गए लोगों के परिवारों को भी मुआवजे की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पिछले पांच महीनों में मारे गए हजारों लोगों के परिजनों के लिए भी नुकसान की भरपाई की बात कही। हालांकि इन दावों और मुआवजे की संभावित प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को इस मुद्दे को भविष्य की बातचीत में शामिल करने के निर्देश दे दिए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित समझौते को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं। ट्रंप ने इससे पहले संकेत दिया था कि वह सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकते हैं।
दूसरी ओर ईरान भी अमेरिका के सामने अपनी कई शर्तें रख रहा है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में जारी नाकाबंदी हटाने के साथ युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फंसी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें उठाई गई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट रखा है और अमेरिका से क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप कम करने की मांग की है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ने का इंतजार कर रहा है। उनका मानना है कि महंगाई और कमजोर होती आर्थिक स्थिति ईरानी नेतृत्व को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत भले ही जारी रहने के संकेत दे रही हो लेकिन मुआवजे युद्ध के नुकसान और होर्मुज जैसे मुद्दों ने समझौते की राह को और मुश्किल बना दिया है। आने वाले दिनों में ट्रंप का यह नया रुख अमेरिका ईरान संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।
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