नई दिल्ली। UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने को लेकर चर्चा के बीच डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़ा एक अहम आंकड़ा सामने आया है। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान UPI ट्रांजैक्शन की वॉल्यूम ग्रोथ पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत अंक कम रही। हालांकि, इस दौरान ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू की ग्रोथ करीब 20 फीसदी पर बनी रही।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच UPI पर करीब 92 अरब ट्रांजैक्शन हुए। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 74.5 अरब था। यानी संख्या के लिहाज से लेनदेन में करीब 23.5 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी हुई, लेकिन पिछले साल इसी अवधि में दर्ज करीब 33.5 फीसदी की ग्रोथ की तुलना में रफ्तार कम रही।
UPI ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ जरूर रही है, लेकिन इसकी सालाना वृद्धि दर में पिछले कुछ वर्षों से नरमी देखी जा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में UPI वॉल्यूम ग्रोथ करीब 41 फीसदी रही थी। FY26 यानी 2025-26 में यह घटकर करीब 30 फीसदी रह गई। अब FY27 के शुरुआती चार महीनों में सालाना वॉल्यूम ग्रोथ करीब 23.5 फीसदी दर्ज हुई है।
इसका मतलब यह नहीं है कि UPI का इस्तेमाल कम हो गया है। बल्कि लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन जिस रफ्तार से इसमें साल-दर-साल इजाफा हो रहा था, वह गति अब कुछ धीमी पड़ती दिखाई दे रही है।
UPI के आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। ट्रांजैक्शन की संख्या की ग्रोथ भले धीमी हुई हो, लेकिन इन लेनदेन की कुल वैल्यू में वृद्धि मजबूत बनी हुई है।
FY26 में UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू की ग्रोथ करीब 18.5 फीसदी थी, जबकि FY27 के पहले चार महीनों में यह लगभग 20 फीसदी रही। यानी कम ट्रांजैक्शन ग्रोथ के बावजूद UPI के जरिए होने वाले भुगतान का कुल आर्थिक मूल्य तेजी से बढ़ रहा है।
भारत में वर्ष 2020 से UPI पर जीरो MDR व्यवस्था लागू है। इसका मतलब है कि व्यापारियों से UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करने पर कोई MDR नहीं लिया जाता।
फिनटेक और पेमेंट कंपनियों का तर्क है कि UPI पर प्रत्यक्ष रेवेन्यू मॉडल नहीं होने से बैंक और पेमेंट कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर, नए ग्राहकों और मर्चेंट नेटवर्क के विस्तार में पर्याप्त निवेश नहीं कर पातीं। उनका कहना है कि MDR से मिलने वाली आय का इस्तेमाल कैशबैक, ग्राहक जोड़ने और डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है।
हालांकि, इसके उलट कई विशेषज्ञों का मानना है कि UPI एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है और जीरो MDR ने ही छोटे कारोबारियों तथा आम लोगों के बीच इसकी पहुंच तेजी से बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कुछ अधिकारियों का मानना है कि देश में UPI की पहुंच अभी भी करीब 40 फीसदी आबादी तक है। ऐसे में नए यूजर्स और कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने की काफी गुंजाइश मौजूद है।
यही वजह है कि UPI की मौजूदा ग्रोथ को लेकर चर्चा सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि भविष्य में इसके विस्तार के लिए लागत और कमाई का मॉडल कैसा होगा।
लोकसभा ने 6 अगस्त 2026 को Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित किया। इसके बाद बड़े मर्चेंट्स से जुड़े हाई-वैल्यू UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकार बड़े कारोबारियों के लिए करीब 0.25 से 0.30 फीसदी तक MDR लगाने के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि, इसे लेकर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
देश के कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 88 फीसदी बताई जाती है। हर महीने UPI पर 23 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन होते हैं और इनका कुल मूल्य लगभग 30 लाख करोड़ रुपये रहता है।
ऐसे में MDR व्यवस्था में कोई भी बदलाव सिर्फ बैंक और फिनटेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर छोटे-बड़े कारोबारियों, पेमेंट कंपनियों और करोड़ों UPI यूजर्स पर पड़ सकता है। यही वजह है कि एक तरफ UPI की ग्रोथ में आई नरमी पर नजर है, तो दूसरी तरफ MDR को लेकर सरकार के संभावित फैसले को लेकर डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री में भी हलचल बढ़ गई है।
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