
भोपाल। यूजीसी के वर्ष 2026 के नए प्रावधानों के विरोध में शनिवार को भोपाल में सवर्ण समाज ने आंदोलन की शुरुआत की। माता मंदिर स्थित प्लेटिनम प्लाजा से राजभवन तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला। राजभवन पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए प्रावधानों को वापस लेने समेत आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई से पहले जांच की मांग उठाई।प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने कहा कि नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज में असंतोष है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों का असर विद्यार्थियों और उनके अधिकारों पर पड़ रहा है। इसी को लेकर भोपाल से आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने की रणनीति बनाई गई है।
प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग रखी। इसके साथ ही एससी-एसटी एक्ट के मामलों में कार्रवाई से पहले जांच किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। समाज का कहना है कि किसी भी कानून का इस्तेमाल कार्रवाई से पहले तथ्यों की जांच के बाद होना चाहिए।
सवर्ण समाज के कृष्णा बुंदेला ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे स्तर पर कार्यक्रम पहले से आयोजित किए जा रहे थे, लेकिन अब राजधानी भोपाल से आंदोलन का औपचारिक आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन दिल्ली तक आंदोलन ले जाने की शुरुआत है। बुंदेला के मुताबिक, 2012 के यूजीसी एक्ट में बदलाव के बाद वर्ष 2026 में लाए गए नए प्रावधानों को लेकर समाज की आपत्ति है। उनका कहना है कि इससे सवर्ण समाज के बच्चों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “सवर्ण समाज का बच्चा जाएगा कहां? अपने बच्चों की रक्षा के लिए हमें ही मैदान में आना पड़ेगा।
बुंदेला ने सरकार से ऐसे प्रावधान नहीं बनाने की अपील की, जिनसे उनके अनुसार सामाजिक सौहार्द और देश की एकता-अखंडता प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि समाज अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर इसे दिल्ली तक ले जाया जाएगा।भोपाल में हुए पैदल मार्च के साथ ही संगठन ने आगे के आंदोलन के लिए लोगों को जुटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
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