
वाशिंगटन। वाइट हाउस (White House) के एक वरिष्ठ सलाहकार ने मंगलवार को कहाकि भारत (India) द्वारा रूसी तेल खरीद (Russian oil purchases) पर अमेरिकी शुल्क की धमकी से उत्पन्न मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आपस में सुलझा लेंगे। वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की यह टिप्पणी अमेरिकी सीनेट द्वारा एक विधेयक पारित किए जाने के कुछ दिनों बाद आई है। इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल के शीर्ष पांच खरीददारों पर 100 फीसदी शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। इसमें यह दलील दी गई है कि ऐसा व्यापार सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित करता है।
क्या बोले नवारो
नवारो ने कहाकि 2022 में यूक्रेन युद्ध छिड़ने से पहले भारत रूस के साथ तेल व्यापार में शामिल नहीं था, लेकिन बाद में शामिल हो गया। नवारो ने कहाकि राष्ट्रपति ट्रंप और आपके प्रधानमंत्री के बीच बहुत अच्छे कामकाजी संबंध हैं। वे इस मुद्दे का समाधान आपस में निकाल लेंगे और मेरे लिए उनके बीच आने की कोई बात नहीं है। गौरतलब है कि पश्चिमी प्रतिबंधों के कड़े होने के बावजूद, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के रूस से खरीद जारी रखने से भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात लगातार दूसरे महीने रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई। शोध संस्थान ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय खरीदारों ने जुलाई में रूस से 5.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो जून की तुलना में मात्रा के आधार पर 2.1 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान रूस से भारत के कुल ईंधन आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 फीसदी रही।
अमेरिकी सीनेट ने पास किया है बिल
गौरतलब है कि अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के चीन एवं भारत जैसे प्रमुख खरीदार देशों को दंडित करने के उद्देश्य से लाए गए एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। विधेयक में दावा किया गया है कि रूस के साथ इस प्रकार का व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में मदद कर रहा है। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 मतों से मंजूरी दी। यह विधेयक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी शुल्क लगाने का अधिकार देता है। चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देश हैं।
रूस पर प्रतिबंधों के अलावा विधेयक में 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है। इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। इस द्विदलीय विधेयक को रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट पार्टी के नेता एवं सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित किया था। ग्राहम का 11 जुलाई को निधन हो गया था। कीव की यात्रा के बाद ग्राहम के अचानक निधन के पश्चात दोनों दलों के नेताओं ने विधेयक को पारित कराने और यूक्रेन के समर्थक के रूप में दिवंगत सांसद की विरासत का सम्मान करने के लिए नए सिरे से प्रयास तेज किए। ग्राहम के निधन के बाद उनकी सीट से सीनेटर चुनी गईं उनकी बहन डारलाइन ग्राहम ने कहाकि यह विधेयक रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले प्रमुख देशों को एक सरल लेकिन बेहद महत्वपूर्ण विकल्प चुनने के लिए मजबूर करता है-अमेरिका के साथ कारोबार करना या सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदना।
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