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पाकिस्तान पर IMF ने कसा शिकंजा, 7 अरब डॉलर के प्रोग्राम के लिए संसद से करवाने होंगे 174 बदलाव

September 27, 2026

इस्लामाबाद। आर्थिक संकट (Economic crisis) से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ चल रहे 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम की अगली समीक्षा से पहले कई कानूनी और नीतिगत बदलावों की तैयारी चल रही है। पाकिस्तान के वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल (Economic crisis) ने नेशनल असेंबली की वित्त एवं राजस्व संबंधी स्थायी समिति को बताया कि IMF की ओर से करीब 174 विधायी संशोधनों की मांग की गई है। इन संशोधनों को संसद के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा, हालांकि इन्हें पारित करने का अंतिम अधिकार संसद के पास ही रहेगा।

ये बदलाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इनमें वित्तीय क्षेत्र का प्रशासन, सरकारी कंपनियों का संचालन, विदेशी मुद्रा और रेमिटेंस, जलवायु संबंधी सुधार तथा स्थानीय मुद्रा बाजार समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। पाकिस्तान में IMF के 7 अरब डॉलर के एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) की चौथी समीक्षा और 1.4 अरब डॉलर की रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) की तीसरी समीक्षा के लिए IMF मिशन की प्रक्रिया शुरू हो रही है।

संसद की मंजूरी जरूरी

पाकिस्तान सरकार इन संशोधनों को तैयार कर संसद के सामने पेश करने की प्रक्रिया में है। वित्त सचिव ने स्पष्ट किया कि IMF की ओर से बदलावों की मांग की गई है, लेकिन इन्हें मंजूरी देना संसद का अधिकार है। ऐसे में सरकार को इन प्रस्तावों को विधायी प्रक्रिया से आगे बढ़ाना होगा।

सरकारी कंपनियों और सॉवरेन वेल्थ फंड पर जोर

IMF के साथ बातचीत में सॉवरेन वेल्थ फंड (SWF) के कानून में बदलाव भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस फंड से जुड़ी सरकारी कंपनियों के प्रशासन, वित्तीय रिपोर्टिंग और निगरानी व्यवस्था को व्यापक सरकारी उपक्रमों पर लागू नियमों के अनुरूप करने पर चर्चा हो रही है। IMF पहले भी पाकिस्तान से SWF के संचालन में बेहतर गवर्नेंस और वित्तीय सुरक्षा उपाय लागू करने को कह चुका है।

पाकिस्तान के सरकारी उपक्रमों में सुधार IMF कार्यक्रम का लगातार हिस्सा रहे हैं। फंड के दस्तावेजों में सरकारी कंपनियों की गवर्नेंस व्यवस्था मजबूत करने, घाटे और वित्तीय जोखिम घटाने तथा जरूरत के अनुसार निजीकरण और पुनर्गठन पर जोर दिया गया है।


  • चीनी नीति में बदलाव पर भी चर्चा

    पाकिस्तान की चीनी नीति भी IMF के साथ बातचीत का हिस्सा है। IMF के कार्यक्रम के तहत चीनी बाजार में सरकारी हस्तक्षेप कम करने, लाइसेंसिंग और उत्पादन संबंधी प्रतिबंधों में बदलाव तथा आयात-निर्यात व्यवस्था को अधिक उदार बनाने जैसे सुधारों पर जोर दिया गया है। IMF के हालिया कार्यक्रम दस्तावेज में चीनी बाजार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाने की नीति का उल्लेख है।

    रेमिटेंस पर मिलने वाली सब्सिडी भी मुद्दा

    विदेशों से पाकिस्तान भेजे जाने वाले पैसे यानी रेमिटेंस को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता भी IMF की समीक्षा में चर्चा का विषय है। IMF ने रेमिटेंस बढ़ाने के लिए महंगी सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं पर निर्भरता घटाने और सीमा-पार भुगतान की लागत व अन्य संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया है।

    पाकिस्तान सरकार ने पहले रेमिटेंस प्रोत्साहन के लिए दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती की है। IMF के अनुसार, लंबी अवधि में लक्ष्य ऐसा ढांचा तैयार करना है जिसमें कम सरकारी वित्तीय सहायता के बावजूद रेमिटेंस प्रवाह को बढ़ावा मिल सके।

    इस तरह 174 प्रस्तावित संशोधनों का दायरा टैक्स और सरकारी खर्च से आगे बढ़कर सरकारी कंपनियों, वित्तीय प्रशासन, कमोडिटी बाजार, रेमिटेंस और आर्थिक गवर्नेंस तक फैला हुआ है। इन बदलावों को संसद के सामने रखने के बाद उनका पारित होना पाकिस्तान की आगामी IMF समीक्षा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जाएगा।

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