नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान (Ongoing internal infighting within the Punjab Congress) के बीच पार्टी के 15 विधायकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात का समय मांगा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर मिलने की इच्छा जताई है। संभावित बैठक में पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है।
कांग्रेस के एक विधायक ने राहुल गांधी से मिलने के लिए पत्र भेजे जाने की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने बैठक के एजेंडे के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार किया। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी में लंबे समय से चल रही खींचतान और नेताओं के बीच बढ़ती दूरी बैठक का प्रमुख मुद्दा हो सकती है।
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद लंबे समय से चर्चा में हैं। पार्टी नेतृत्व की ओर से संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच एकजुटता कायम रखने की कोशिशों के बावजूद प्रदेश इकाई में गुटबाजी खत्म होती नजर नहीं आ रही।
विवाद उस समय और खुलकर सामने आया, जब कांग्रेस नेतृत्व ने 1 जुलाई को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने का फैसला किया। इसी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले को लेकर पार्टी के भीतर असहमति के स्वर उठे। इसके बाद पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने राज्य का दौरा किया और करीब छह दिनों तक विभिन्न नेताओं से मुलाकात कर संगठन की स्थिति का जायजा लिया।
हालांकि, 16 जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद चन्नी ने विवाद की खबरों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा था कि सब ठीक है और वह समेत अन्य नेता पार्टी आलाकमान के फैसलों का पालन करेंगे।
पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी पिछले सप्ताह लुधियाना में आयोजित ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ कार्यक्रम में भी दिखाई दी। यहां राजा वड़िंग और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु के समर्थकों के बीच जमकर नारेबाजी हुई।
कार्यक्रम में भारत भूषण आशु और सिमरजीत सिंह बैंस के समर्थकों के बीच टकराव की स्थिति भी बन गई थी। हालांकि, समय रहते मामला शांत करा लिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यक्रम शुरू होने से पहले आशु समर्थक आगे की पंक्तियों में बैठे थे। जैसे ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेता मंच पर पहुंचे, आशु समर्थकों ने उनके समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए।
इसके बाद वड़िंग समर्थकों, जिनमें बैंस बंधु के समर्थक भी शामिल थे, ने कथित तौर पर ‘आरएसएस वर्कर्स बाहर जाओ’ के नारे लगाए। इस पर आशु समर्थकों ने आपत्ति जताई और कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रम में इस तरह की नारेबाजी उचित नहीं है।
भारत भूषण आशु के करीबी सहयोगी ईश्वरजोत चीमा ने दावा किया कि उनके समर्थक सद्भावना के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनके मुताबिक, जब सिमरजीत सिंह बैंस को मंच से बोलने के लिए माइक दिया गया तो आशु समर्थकों ने केवल भारत भूषण आशु के समर्थन में नारे लगाए।
चीमा का दावा है कि उनके समर्थकों ने न तो भूपेश बघेल और न ही राजा वड़िंग के खिलाफ नारे लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि माहौल शांत करने के बजाय राजा वड़िंग खुद नारे लगाने लगे, जिसके बाद दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया।
स्थिति बिगड़ने से पहले आशु समर्थकों ने कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलने का फैसला किया।
अब 15 विधायकों की राहुल गांधी से प्रस्तावित मुलाकात ने पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेताओं के बीच चल रही खींचतान को खत्म कर संगठन को एकजुट करना है।
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में राहुल गांधी के साथ होने वाली बैठक में संगठन की मौजूदा स्थिति, गुटबाजी और आगामी चुनाव की तैयारियों पर मंथन होने की संभावना है। सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी पंजाब कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाकर पार्टी को बिखरने से रोक पाएंगे?
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