
जबलपुर। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा सोमवार को 7 जनपद पंचायतों में नई क्लस्टर व्यवस्था लागू करने के विरोध में कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। इस प्रशासनिक निर्णय के खिलाफ आदिवासी बहुजन अधिकार कल्याण संघ और मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर एवं संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अबाक्स के प्रांतीय अध्यक्ष देवेश कुमार चौधरी, जिला अध्यक्ष शिव कुमार गोंटिया, प्रदेश महासचिव कमलेश धापोड़कर, जिला महासचिव शुभम चौधरी तथा तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष अतुल मिश्रा ने पनागर जनपद में 5 और जबलपुर जनपद में 4 सहायक विकास विस्तार अधिकारियों तथा पंचायत समन्वय अधिकारियों को क्लस्टर प्रभार से हटाने की विभागीय कार्रवाई को पूरी तरह नियम विरुद्ध और अनुचित ठहराया है।
नियमों की अनदेखी से मैदानी व्यवस्था बिगड़ी
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि शासन की तय कार्यप्रणाली के तहत ही मैदानी अमले को ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। शासकीय योजनाओं के तेज क्रियान्वयन का बहाना बनाकर लंबे समय से कार्यरत अनुभवी कर्मियों को फील्ड से अलग करना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है। जमीनी अमले को जनपद दफ्तरों में क्लर्क शाखाओं में बैठाने की तैयारी चल रही है। यह कदम राज्य सेवा नियमों और आचरण संहिता के सीधे तौर पर विपरीत है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा ऐसा कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या परिपत्र जारी नहीं किया गया है। स्थानीय स्तर पर बिना किसी ठोस आधार के यह फेरबदल किया गया है, जिसके कारण योजनाओं के संचालन और पर्यवेक्षण कार्य पर गहरा नकारात्मक असर पडऩा तय है।
फैसला वापस नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि नवाचार के नाम पर कर्मियों का मानसिक उत्पीडऩ बर्दाश्त से बाहर है। बिना किसी उच्चस्तरीय आदेश के स्थानीय स्तर पर लिए गए इस फैसले से पूरे अमले में भारी रोष है। उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है कि वे मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत संज्ञान लें। यदि जिला प्रशासन ने जारी व्यवस्था को अविलंब निरस्त नहीं किया, तो संयुक्त मंच सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। कर्मचारी अपने सेवा अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए चरणबद्ध रूप से शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक तरीके से व्यापक स्तर पर विरोध दर्ज कराएंगे।
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