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मिलावटखोर बेखौफ, करोड़ों की फूड लैब बेबस! सर्टिफिकेट के फेर में अटकी जांच व्यवस्था

October 03, 2026

  • डुमना में बनी संभागीय खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल सर्टिफिकेट का इंतजार, दूसरे जिलों पर निर्भरता से सैंपलों की जांच में देरी

जबलपुर। मिलावटखोरों पर नकेल कसने और लोगों को सुरक्षित एवं शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डुमना में तैयार की गई संभागीय स्तर की खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला अब खुद सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपए खर्च कर भवन तैयार किया गया और अत्याधुनिक मशीनें भी स्थापित की गईं, लेकिन प्रयोगशाला में नियमित रूप से खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच शुरू नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें बाजारों से लगातार सैंपल तो जुटा रही हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण इन्हें दूसरे जिलों की प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ रहा है। इससे रिपोर्ट आने में समय लग रहा है और मिलावट के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।



  • एनएबीएल सर्टिफिकेट बना सबसे बड़ा अड़ंगा
    प्रयोगशाला में जांच शुरू नहीं होने की प्रमुख वजह नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) से मिलने वाला मान्यता प्रमाणपत्र बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार लैब की मान्यता से जुड़ा ऑडिट हाल ही में पूरा किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अगले एक-दो महीने में सर्टिफिकेट मिलने की उम्मीद है। इसके बाद ही प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों सहित अन्य नमूनों की विधिवत जांच शुरू हो सकेगी। प्रयोगशाला में जनता के टैक्स से खरीदी गई महंगी और आधुनिक जांच मशीनें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों के जरिए खाद्य पदार्थों में मिलावट और उनकी गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच की जानी है। लेकिन जब तक प्रयोगशाला को आवश्यक मान्यता नहीं मिलती, तब तक इन मशीनों का पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार की गई इस सुविधा का लाभ आखिर आम जनता को कब मिलेगा?

    दूसरे जिलों के भरोसे सैंपल, मिलावट की जांच में देरी
    जबलपुर सहित पूरे संभाग में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर दूध, मिठाई, तेल, मसाले, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल लिए जाते हैं। लेकिन स्थानीय प्रयोगशाला में जांच नहीं होने के कारण इन नमूनों को दूसरे जिलों में भेजना पड़ता है। दूसरी प्रयोगशालाओं में पहले से बड़ी संख्या में सैंपल लंबित होने की स्थिति में जबलपुर से भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट आने में भी समय लग रहा है। इसका सीधा असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जिनमें रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जानी है।

    ‘सफेद हाथीÓ बनने से पहले शुरू हो जांच
    खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान के लिए वैज्ञानिक जांच बेहद महत्वपूर्ण है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित प्रतिष्ठान या कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई आगे बढ़ती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर अत्याधुनिक प्रयोगशाला उपलब्ध होने के बावजूद जांच के लिए दूसरे जिलों पर निर्भरता व्यवस्था की गति को प्रभावित कर रही है।

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