
जबलपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा को नई पीढ़ी की राजनीतिक भागीदारी का मंच माना जाता है, लेकिन संस्कारधानी जबलपुर में इसी युवा संगठन की नगर इकाई का नेतृत्व लंबे समय से चर्चा और इंतजार के बीच अटका हुआ है। जुलाई 2026 में प्रदेश स्तर पर 15 जिलों के भाजयुमो अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं, जिनमें जबलपुर ग्रामीण की जिम्मेदारी पंकज तिवारी को दी गई थी। जबलपुर नगर की तस्वीर हालांकि अलग नजर आ रही है। संगठन के भीतर अध्यक्ष पद को लेकर सहमति नहीं बनने की चर्चाओं के बीच कई युवा चेहरों के नाम संभावित दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं। किसके समर्थक को कमान मिलेगी, यही सवाल फिलहाल संगठन के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा में है।
प्रदेश में नियुक्तियां आगे बढ़ीं, नगर में इंतजार क्यों?
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने जुलाई में 15 जिलों के अध्यक्षों और कुछ जिला महामंत्रियों की नियुक्तियां की थीं। इससे साफ है कि प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में जबलपुर नगर की नियुक्ति को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर नगर अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर कब लगेगी?
चार विधानसभा क्षेत्रों की सियासत का असर?
चार विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों का असर युवा मोर्चे की नियुक्ति पर पडऩे की चर्चाएं हैं। संगठन के अंदर यह माना जा रहा है कि अलग-अलग खेमे अपने पसंदीदा युवा चेहरे को आगे बढ़ाना चाहते हैं। यही वजह बताई जा रही है कि किसी एक नाम पर सहमति बनते-बनते मामला फिर अटक जाता है। हालांकि, भाजपा के किसी बयान से यह पुष्टि नहीं हुई है कि नियुक्ति में विधायकों की असहमति ही देरी का कारण है।
नामों की चर्चा, सहमति का इंतजार
संगठन के भीतर सक्रिय युवा कार्यकर्ताओं के नाम चर्चा में होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन नामों को लेकर कोई सूची जारी नहीं हुई है। इसलिए इसे संगठनात्मक चर्चा के स्तर पर ही देखा जा रहा है। युवा मोर्चा का नगर अध्यक्ष संगठनात्मक पद नहीं माना जाता। पार्टी के विभिन्न आंदोलनों में मोर्चे की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में पद खाली रहने से कार्यकर्ताओं में असमंजस है।
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