
नई दिल्ली । किशोरों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने की दिशा में ChatGPT में नया टीन मोड (Teen Mode) पेश किया गया है। यह सुविधा 13 से 17 वर्ष की उम्र के यूजर्स (Users) को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य किशोरों को एआई का इस्तेमाल करते समय संवेदनशील (Sensitive) और संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री से अतिरिक्त सुरक्षा देना है।
नए अनुभव में आत्म-हानि, हिंसा, यौन सामग्री, खाने-पीने से जुड़े विकार और अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित बातचीत पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। ऐसे मामलों में चैटबॉट बातचीत को सीमित करने या सुरक्षित दिशा में मोड़ने का प्रयास करेगा। इसका मकसद किशोरों के लिए एआई के इस्तेमाल को उम्र के अनुरूप अधिक सुरक्षित बनाना है।
टीन मोड का एक महत्वपूर्ण पहलू पढ़ाई से जुड़ा है। आमतौर पर छात्र होमवर्क या असाइनमेंट के सवालों का तैयार जवाब हासिल करने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। नए अनुभव में इस तरीके को बदलने की कोशिश की गई है। यदि किसी बातचीत से पता चलता है कि छात्र होमवर्क पूरा करने के लिए सीधे उत्तर चाहता है, तो चैटबॉट केवल तैयार जवाब देने के बजाय सवाल पूछकर और चरणबद्ध तरीके से समझाकर मदद कर सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को विषय समझने, समस्या का विश्लेषण करने और स्वयं समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे एआई को केवल उत्तर उपलब्ध कराने वाले माध्यम के बजाय पढ़ाई में सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इससे होमवर्क में एआई के इस्तेमाल और शैक्षणिक ईमानदारी से जुड़ी बहस भी आगे बढ़ सकती है।
किशोरों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों की भूमिका को भी महत्व दिया गया है। पैरेंटल कंट्रोल और नोटिफिकेशन जैसी सुविधाओं के माध्यम से माता-पिता अपने किशोर के ChatGPT इस्तेमाल से जुड़े कुछ सुरक्षा विकल्पों को नियंत्रित कर सकते हैं। उच्च जोखिम वाली परिस्थितियों में उपलब्ध सुरक्षा सूचनाएं अभिभावकों को समय पर स्थिति समझने में मदद कर सकती हैं।
टीन मोड में केवल कंटेंट फिल्टरिंग ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि एआई के साथ किशोरों की बातचीत का तरीका भी ध्यान में रखा गया है। सिस्टम को इस तरह तैयार करने का प्रयास किया गया है कि किशोर चैटबॉट को वास्तविक व्यक्ति या भावनात्मक साथी समझकर उस पर अत्यधिक निर्भर न हों। यह पहल एआई के साथ बच्चों के लंबे और संवेदनशील संवाद से जुड़े जोखिमों को कम करने की दिशा में देखी जा रही है।
उम्र की पहचान इस पूरी व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यूजर की वास्तविक उम्र की पुष्टि करना आसान नहीं होता। कई किशोर पंजीकरण के समय सही उम्र दर्ज नहीं करते, जिससे उम्र के आधार पर उचित सुरक्षा लागू करना मुश्किल हो सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए उम्र से जुड़े अलग-अलग संकेतों के आधार पर पहचान को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।
एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों और किशोरों की डिजिटल सुरक्षा पर दुनियाभर में चर्चा बढ़ी है। ऐसे में ChatGPT का टीन मोड तकनीक और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किशोर इसका इस्तेमाल किस तरह करते हैं और अभिभावक उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं का कितना प्रभावी उपयोग करते हैं।
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