img-fluid

खाड़ी देशों को जोर का झटका: केन्या के तेल बाजार में भारत ने पलटी बाजी, UAE और सऊदी अरब को पीछे छोड़ा

August 27, 2026

नई​ दिल्ली. अगर हम किसी देश को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स (Petroleum products) सप्लाई करने बात करें तो सबसे पहले दिमाग में जिन देशों का नाम कौंधता है उनमें- सऊदी अरब, कतर, यूएई, ईरान, इराक (Saudi Arabia, Qatar, UAE, Iran, Iraq) शामिल होते हैं. इसके पीछे वाजिब कारण भी है. ये सभी ऐसे देश हैं जहां प्राकृतिक ईंधन संसाधनों की कोई कमी नहीं. भारत (India) हमेशा से एक पेट्रोलियम आयातक देश रहा है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस समय भारत खाड़ी और अरब देशों को पछाड़कर कई देशों के लिए पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का प्रमुख निर्यातक बन गया है. इनमें एक नाम केन्या (Kenya) भी है.

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पश्चिम एशिया में फ्यूल ट्रेड रूट्स बाधित होने से यूएई और सऊदी अरब की सप्लाई प्रभावित हुई. इसके बाद पूर्वी अफ्रीकी देश को पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल के लिए भारत का रुख करना पड़ा है. भारत खाड़ी देशों को पछाड़ते हुए केन्या के लिए पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है.


  • सरकारी समझौतों से होती थी फ्यूल खरीद
    केन्या लंबे समय से सरकारी सपोर्ट वाले समझौतों के तहत पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदता रहा है. इनमें पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल शामिल हैं. इनकी सप्लाई मुख्य रूप से सऊदी अरामको, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और एमिरेट्स नेशनल ऑयल कंपनी जैसी कंपनियों से होती थी. हालांकि, पश्चिम एशिया में पैदा हुई आपूर्ति बाधाओं के बाद केन्या को अपना फ्यूल सोर्स बदलना पड़ा.

    बेल्जियम की कमोडिटी डेटा कंपनी Kpler के आंकड़ों का हवाला देते हुए विश्व प्रसिद्ध एनर्जी एनालिस्ट अनस अलहाजी (Anas Alhajji) ने बताया कि भारत ने केन्या को गैसोलीन, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल की सप्लाई में यूएई और सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह भी कहा कि जुलाई में अफ्रीका को भारत का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.

    अफ्रीका में भारतीय फ्यूल की मांग बढ़ी है
    अलहाजी के मुताबिक, जुलाई में अफ्रीका को भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट में सालाना आधार पर 66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. उनके अनुसार, यूरोपीय संघ की पाबंदियों के बाद भारतीय कार्गो का एक हिस्सा यूरोप से हटकर अफ्रीकी बाजारों की ओर गया. ईयू ने तीसरे देशों से ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, जिन्हें रूसी क्रूड से रिफाइन किया गया था. इसके बाद भारतीय रिफाइनरों के लिए अफ्रीकी बाजारों में अवसर बढ़े.

    भारत की रिफाइनिंग क्षमता बनी ताकत
    भारत की बढ़ती भूमिका के पीछे उसकी मजबूत रिफाइनिंग कैपबिलिटी अहम है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनर और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है. देश में 22 चालू रिफाइनरियों की कुल क्षमता 258.1 मिलियन टन सालाना है.

    वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात किया. खास बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और उसे देश की रिफाइनरियों में प्रोसेस करके पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के रूप में दुनिया के अलग-अलग बाजारों में भेजता है.

    जामनगर की रिफाइनिंग क्षमता की भी चर्चा
    भारत में दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स भी मौजूद है. गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स भारत की विशाल रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा उदाहरण है. रिफाइनिंग सेक्टर में भारत की इसी ताकत के बीच रूस से जुड़ा एक और बदलाव देखने को मिला है. यूक्रेन के हमलों से रूसी रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ने के बाद रूस ने भी भारत से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खरीद शुरू की है.

    भारत रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट केन्या गए
    केन्या के न्यूज आउटलेट Kenyans की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केन्या में यूएई से पेट्रोलियम सप्लाई जनवरी में करीब 90,000 बैरल प्रतिदिन थी, जो अगस्त में घटकर लगभग 15,000 बैरल प्रतिदिन रह गई. दूसरी ओर, भारतीय सप्लाई की भूमिका बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 19 मार्च को गुजरात के सिक्का बंदरगाह से लदा करीब 82.38 मिलियन लीटर केरोसिन केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पहुंचा. इसी बंदरगाह से अप्रैल के लिए 156.75 मिलियन लीटर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई निर्धारित थी. इसमें 81.15 मिलियन लीटर केरोसिन और 75.6 मिलियन लीटर डीजल शामिल था.

    जुलाई में केन्या एक्सपोर्ट में जोरदार उछाल
    भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में केन्या को भारत का कुल एक्सपोर्ट मूल्य के आधार पर 151.41 फीसदी बढ़ा. केन्या इस महीने भारत के पांच सबसे तेजी से बढ़ते एक्सपोर्ट बाजारों में शामिल रहा. हालांकि, यह आंकड़ा सभी तरह के उत्पादों के निर्यात से जुड़ा है, केवल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से नहीं. इसी अवधि में भारत का ग्लोबल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट भी तेजी से बढ़ा. जुलाई में इसका मूल्य 4.13 अरब डॉलर से बढ़कर 6.92 अरब डॉलर पहुंच गया, यानी सालाना आधार पर करीब 67.64 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.

    भारत-केन्या ट्रेड में पेट्रोलियम प्रोडक्ट अहम
    भारत और केन्या के बीच व्यापारिक संबंधों में भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अहम भूमिका है. भारत 2025-26 में केन्या का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार करीब 4.31 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का एक्सपोर्ट लगभग 4.01 अरब डॉलर और केन्या से भारत का इंपोर्ट करीब 290 मिलियन डॉलर रहा. पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट आइटम में शामिल रहे. फिलहाल, मिडिल ईस्ट में सप्लाई रूट्स में आई बाधाओं और अफ्रीकी बाजारों में बढ़ती मांग ने भारत के लिए नया अवसर पैदा किया है. केन्या में भारतीय फ्यूल की बढ़ती हिस्सेदारी और जुलाई के एक्सपोर्ट आंकड़े इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं.

    Share:

  • नेपाल त्रासदी: तबाही के एक दिन बाद सामने आया बड़ा खतरा, 47 ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं बाढ़ की वजह

    Thu Aug 27 , 2026
    काठमांडू. नेपाल (Nepal) में 47 ग्लेशियल झीलों (47 glacial lakes) को संभावित रूप से खतरनाक माना गया है। वैज्ञानिक आकलन के अनुसार, इन झीलों के फटने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी अचानक आने वाली विनाशकारी बाढ़ का खतरा है। ऐसी बाढ़ नेपाल की प्रमुख नदी घाटियों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ सड़कों, […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved