भोपाल। मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह (Vijay Shah) के विवादित बयान से जुड़े मामले में मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने विजय शाह (Vijay Shah) के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया है। यह फैसला कैबिनेट की बैठक में लिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मामला कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मई 2025 में दिए गए विजय शाह के विवादित बयान से जुड़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी ने भारत की कार्रवाई को लेकर मीडिया को जानकारी दी थी। इसके बाद इंदौर के महू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह की टिप्पणी पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
सरकार ने क्यों नहीं दी अभियोजन की मंजूरी?
सूत्रों के अनुसार, सरकार का तर्क है कि विजय शाह अपने बयान को लेकर कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। इसके अलावा मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी SIT अपनी जांच पूरी कर चुका है।
SIT ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(A) के तहत विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगी थी। चूंकि संबंधित मामले में लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है, इसलिए SIT की रिपोर्ट के बाद भी अभियोजन की मंजूरी का मामला सरकार के पास लंबित था।
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अभियोजन की मंजूरी पर जल्द निर्णय लेने को कहा था। अब 31 अगस्त को मामले की सुनवाई प्रस्तावित है। इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार एफिडेविट के जरिए अदालत को अपने फैसले और रुख की जानकारी दे सकती है।
क्या कहा था विजय शाह ने?
मई 2025 में महू में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की थी, जिस पर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया था। उनके बयान को कर्नल कुरैशी को पहलगाम आतंकी हमले में शामिल आतंकवादियों के समुदाय से जोड़कर देखने के रूप में लिया गया।
विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह की आलोचना हुई और उनके इस्तीफे की मांग भी उठी। बाद में उन्होंने अपने बयान को लेकर माफी मांगी थी।
मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए विजय शाह की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने उनकी भाषा को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT का गठन किया गया। SIT ने अपनी जांच पूरी कर अभियोजन की अनुमति मांगी। अब राज्य सरकार के ताजा फैसले के बाद इस मामले में अगली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved