
नई दिल्ली ।पूर्व केंद्रीय मंत्री (Former Union Minister) और भाजपा नेता (BJP Leader) स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने 2024 लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में अमेठी (Amethi)से मिली हार और उसके बाद राज्यसभा सीट (Rajya Sabha Seat)नहीं मिलने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के संगठन में किसी पद को व्यक्तिगत पहचान या राजनीतिक ताकत का प्रतीक नहीं माना जाता, बल्कि उसे काम करने का अवसर समझा जाता है।
एक बातचीत के दौरान स्मृति ईरानी से पूछा गया कि अमेठी लोकसभा सीट पर हार के बाद पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा में क्यों नहीं भेजा। इसके जवाब में उन्होंने संगठन में अपनी भूमिका और राजनीतिक सफर को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यदि केवल राजनीतिक ताकत ही महत्वपूर्ण होती, तो वह अमेठी जैसी सीट से चुनाव लड़ने का फैसला नहीं करतीं।
स्मृति ईरानी ने अमेठी को भाजपा के लिए लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण सीट बताते हुए कहा कि उन्होंने वहां राजनीतिक जोखिम उठाया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हराकर अमेठी में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की थी। हालांकि 2024 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा।
स्मृति ईरानी इससे पहले राज्यसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं। वह 2011 से 2019 तक राज्यसभा सांसद रहीं। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका को आगे बढ़ाया और 2019 में अमेठी से जीत हासिल की।
2024 के चुनाव के बाद उन्हें राज्यसभा नहीं भेजे जाने के सवाल पर स्मृति ईरानी ने कहा कि भाजपा में संगठन का काम पद से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 2003 में महाराष्ट्र भाजपा युवा मोर्चा में पदाधिकारी के रूप में काम शुरू किया था।
उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि उस समय उनके साथ संगठन में देवेंद्र फडणवीस भी काम कर रहे थे। दोनों ने शुरुआती दिनों में वरिष्ठ नेताओं से संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की सीख ली। स्मृति ईरानी के मुताबिक, उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भविष्य में दोनों इतनी महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिकाओं तक पहुंचेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआती संगठनात्मक दौर में कार्यकर्ताओं की मदद करना उनके काम का हिस्सा था। कई बार अभियान और संगठन से जुड़े कामों के लिए उन्हें अपने घर से पेट्रोल और पानी के पैसे लेने पड़ते थे। उनके अनुसार, उस समय कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और जरूरतमंद साथियों की मदद करने की सीख संगठन के स्तर पर दी जाती थी।
स्मृति ईरानी ने कहा कि लंबे समय तक संगठन में काम करने और कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत करने के कारण उनके लिए पद का महत्व सीमित है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सार्वजनिक रूप से मिली प्रशंसा को भी अपने राजनीतिक सफर की उपलब्धियों में शामिल बताया।
इंटरव्यू में बंगाल के एक कार्यक्रम से जुड़े वायरल वीडियो पर भी उनसे सवाल किया गया। विपक्ष की ओर से दावा किया गया था कि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नजरअंदाज किया। इस पर स्मृति ईरानी ने कहा कि वीडियो में प्रधानमंत्री की पीठ दिखाई दे रही थी और केवल उस दृश्य के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि उस समय कौन किसका अभिवादन कर रहा था।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता मौजूद थे और बंगाल में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया है। उनके अनुसार, उस समय मंच पर मौजूद लोगों के लिए चुनावी जीत और कार्यकर्ताओं को मिलने वाला सम्मान अधिक महत्वपूर्ण था।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved