
नई दिल्ली । नीति आयोग के पूर्व CEO (Former NITI Aayog CEO) अमिताभ कांत (Amitabh Kant) ने बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के बीच भारत की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए भारत को अमेरिका और चीन दोनों के साथ संतुलित और व्यावहारिक रणनीति बनाकर आगे बढ़ना होगा। उनके मुताबिक, चीन(China) की क्लीन टेक्नोलॉजी (Clean Technology) में मजबूत स्थिति को नजरअंदाज करना भारत के ऊर्जा संक्रमण के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
अमिताभ कांत ने बताया कि क्लीन टेक्नोलॉजी के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में चीन का दबदबा है। उनके अनुसार, दुनिया की करीब 95 प्रतिशत क्लीन बैटरियां और 85 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन चीन में बनते हैं। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग तकनीक, सोलर और विंड एनर्जी के क्षेत्रों में भी चीन की बड़ी हिस्सेदारी है। सोलर क्षेत्र में चीन का नियंत्रण करीब 80 प्रतिशत और विंड एनर्जी में करीब 77 प्रतिशत बताया गया।
उन्होंने दूसरी ओर जीवाश्म ईंधन के बाजार में अमेरिका के प्रभाव का उल्लेख किया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन का आयात करता है, जिस पर हर साल करीब 180 अरब डॉलर खर्च होते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव या युद्ध की स्थिति बनने पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के आयात बिल, रुपये की स्थिरता और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।
अमिताभ कांत के मुताबिक, विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को तेजी से क्लीन टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ना होगा। ऐसे में भारत के राष्ट्रीय हित में चीन के साथ तकनीकी स्तर पर सहभागिता जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चीन को इस तकनीक को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से रोकना होगा और उसे BRICS देशों तथा ग्लोबल साउथ के साथ तकनीक साझा करनी चाहिए।
उन्होंने चीन की व्यापार नीति से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, चीन की नीति मुख्य रूप से निर्यात पर केंद्रित है, जबकि दूसरे देशों के लिए अपने बाजार को आसानी से नहीं खोलता। नॉन-टैरिफ बैरियर्स के कारण भारत के फार्मास्यूटिकल और ड्रग मैन्युफैक्चरर्स के लिए चीन के बाजार में प्रवेश आसान नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी BRICS शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बातचीत में भारत को चीन के सामने अपने बाजारों को खोलने और क्लीन टेक्नोलॉजी साझा करने के मुद्दे मजबूती से उठाने चाहिए। उनका कहना है कि क्लीन टेक पर किसी एक देश का अत्यधिक नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।
भारत की औद्योगिक क्षमता पर बात करते हुए उन्होंने स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया। सरकार ने पहले सरकारी नियंत्रण वाले कुछ क्षेत्रों को निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोला है। जियो-स्पेशियल, ड्रोन, स्पेस और डिफेंस क्षेत्रों में निजी भागीदारी से नई तकनीक, निवेश और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक और चिप डिजाइन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी बढ़ा रहा है। सेमीकंडक्टर PLI योजना और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेजी को उन्होंने इसका संकेत बताया। भारत का लक्ष्य घरेलू मांग पूरी करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन का प्रमुख हिस्सा बनना है।
अमिताभ कांत ने कहा कि BRICS देश दुनिया की कुल GDP का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। भारत को अपनी अध्यक्षता में संगठन का ध्यान राजनीतिक ध्रुवीकरण या पश्चिम-विरोधी रुख के बजाय व्यापार, निवेश, जलवायु और विकास जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर केंद्रित रखना चाहिए। पश्चिम एशिया के तनाव और सदस्य देशों की अलग-अलग प्राथमिकताओं के बीच भारत को सहमति बनाने की भूमिका निभानी होगी।
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