
मुंबई । केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Union Minister Nitin Gadkari) ने कहा कि भारत में फरवरी से राष्ट्रीय राजमार्गों पर (On National Highways in India from February) बैंरियर-फ्री टोल शुरू हो जाएंगे (Barrier-free Tolling will Start) । इससे वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा।
‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में शुक्रवार को अपने संबोधन में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार अब फास्टैग को गाड़ी की नंबर-प्लेट पहचानने वाली तकनीक के साथ जोड़ने पर विचार कर रही है। वे टोल वसूलने के ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं जो ज्यादा टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा और जिससे टोल कलेक्शन में भी काफी बढ़ोतरी होगी। गडकरी ने कहा, “हम ऐसा टोल सिस्टम लागू करेंगे, जिनमें नंबर प्लेट और फास्टैग दोनों का इस्तेमाल होगा, उससे टोल आय में सालाना 10,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी होगी।”
उन्होंने कहा कि फास्टैग लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर इंतजार का समय, जो कभी 12 मिनट और कुछ मामलों में 30 मिनट तक होता था, अब 80-90 प्रतिशत तक कम हो गया है। सरकार अब बाकी बची देरी को खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सिस्टम से फास्टैग डेटा और गाड़ियों की नंबर प्लेट, दोनों का इस्तेमाल करके टोल कलेक्शन को मजबूत करने की उम्मीद है, जिससे टोल वाले रास्तों पर गाड़ियों की पहचान और ट्रैकिंग बेहतर होगी। गडकरी ने कहा कि फास्टैग ने इंतजार का समय काफी कम करके और टोल प्लाजा पर कैश और छुट्टे पैसे की जरूरत को खत्म करके टोल कलेक्शन के तरीके को पहले ही बदल दिया है। अगला कदम यह पक्का करना है कि गाड़ियों को फीस देने के लिए टोल प्लाजा पर न रुकना पड़े।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टोल पेमेंट को आधुनिक बनाने और टोल प्लाजा पर अनुभव को बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों के तहत 2016 में फास्टैग लॉन्च किया गया था। फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग की ओर भारत के कदम ने साफ नतीजे दिखाए हैं, जिससे टोल कलेक्शन ज्यादा आसान, कुशल और पारदर्शी हो गया है। 2021 में फास्टैग को अनिवार्य कर दिया गया, जिससे नेशनल हाईवे नेटवर्क पर कैश-बेस्ड पेमेंट से इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की ओर बदलाव में तेजी आई।
गडकरी ने बताया कि फास्टैग को अनिवार्य करने के फायदे पहले ही साफ तौर पर दिख रहे हैं, क्योंकि सरकार अब बैरियर-फ्री टोलिंग के अगले चरण की ओर बढ़ रही है। फास्टैग रेडियो-फ्रैक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है ताकि जब गाड़ियां टोल प्लाजा से गुजरें, तो लिंक्ड अकाउंट से टोल चार्ज अपने-आप कट जाएं। इसे अपनाने से कैश पेमेंट पर निर्भरता कम हुई है और टोल कलेक्शन को सुव्यवस्थित करने में मदद मिली है।
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