
उज्जैन। प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में अब यूथ रेडक्रॉस का गठन और संचालन अनिवार्य कर दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले अंडर-ग्रेजुएट (यूजी) और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) समेत सभी पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं से यूथ रेडक्रॉस अंशदान के रूप में 5 रुपए प्रति माह का शुल्क लिया जाएगा।
छात्रों से लिए जाने वाले शुल्क का बंटवारा दो हिस्सों में होगा। इसमें 30′ राशि का हिस्सा हर साल सितंबर माह तक जनरल सेक्रेटरी, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी भोपाल को भेजा जाएगा। 60′ हिस्सा संबंधित कॉलेज या शैक्षणिक संस्था के पास ही रहेगा। इस राशि का उपयोग संस्थाएं यूथ रेडक्रॉस की स्थानीय गतिविधियों के लिए करेंगी। फंड रखने वाले कॉलेजों को अलग बैंक अकाउंट खोलना होगा। आय-व्यय के लिए अलग कैशबुक बनेगी, जिसका हर साल ऑडिट कराना होगा। 18 मई को राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए निर्णय के बाद यह आदेश जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नवंबर 2026 तक सभी शैक्षणिक संस्थाओं को रेडक्रॉस का पंजीयन और गतिविधियों की रूपरेखा हर हाल में पूरी करनी होगी। अकेले उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर में 1500 उच्च शैक्षणिक संस्थान हैं। इन्हें भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके लिए 1 हजार रुपए शुल्क जमा करना होगा। इनमें लगभग 12 लाख स्टूडेंट्स हैं। ऐसे में सिर्फ उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले शैक्षणिक संस्थानों व स्टूडेंट्स से 7.35 करोड़ फंड एक साल में जुटाया जा सकेगा। कॉलेजों को पंजीयन प्रमाण पत्र जनरल सेक्रेटरी, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी (मप्र राज्य शाखा, शिवाजी नगर, भोपाल) से प्राप्त करना होगा।
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