
नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे (Expressways) पर अचानक आवारा पशुओं (Stray Animals) के आ जाने से होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने नई व्यवस्था लागू (New System) की है। इसके तहत ऐसे स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां पशुओं के कारण दुर्घटनाओं (Accidents) का खतरा अधिक रहता है। साथ ही सड़कों पर छोड़े गए पशुओं के मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई और जुर्माने (Fines) की व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP में राष्ट्रीय राजमार्गों और तेज रफ्तार वाले मार्गों को पशुओं से मुक्त रखने के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इसका उद्देश्य सड़क पर अचानक पशु आने से वाहन चालकों के सामने पैदा होने वाली जोखिमपूर्ण स्थिति को कम करना है।
यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है। शीर्ष न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी और उनसे होने वाली घटनाओं को लेकर ठोस व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता जताई थी। इसके बाद सड़क परिवहन मंत्रालय ने राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाने तथा उनके मालिकों की जवाबदेही तय करने के लिए प्रक्रिया तैयार की है।
नई व्यवस्था में NHAI, NHIDCL और लोक निर्माण विभाग जैसी संबंधित एजेंसियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इन एजेंसियों को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे हिस्सों की पहचान करनी होगी, जहां आवारा मवेशियों या अन्य पशुओं की मौजूदगी लगातार सामने आती है या उनके कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
पहचान किए गए स्थानों से पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाकर स्थानीय प्रशासन की ओर से निर्धारित पशु आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाएगा। इस प्रक्रिया में पशुओं की सुरक्षा का ध्यान रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी। पशुओं को सड़क से हटाकर आश्रय स्थल तक पहुंचाने में आने वाला खर्च भी राजमार्ग एजेंसियों द्वारा वहन किया जाएगा।
नई SOP में पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन और पशु आश्रय स्थल पकड़े गए पशुओं से संबंधित रिकॉर्ड बनाएंगे। इसके माध्यम से पशुओं के मालिकों की पहचान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यदि यह पता चलता है कि किसी व्यक्ति ने अपने पशुओं को राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर खुला छोड़ दिया था, तो उसके खिलाफ संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसके लिए पशु अतिचार अधिनियम, 1871 के प्रावधानों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कानून की धारा 25 के तहत प्रशासन को जुर्माना लगाने का अधिकार है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में पकड़े गए पशुओं की बिक्री के जरिए राशि की वसूली का प्रावधान भी मौजूद है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पशुपालकों को अपने पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ने से रोकना है।
सरकारी आंकड़ों में फिलहाल केवल पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों का अलग से पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, वर्ष 2024 में रन ऑफ द रोड श्रेणी में करीब 19,082 दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिनमें लगभग 8,917 लोगों की मौत हुई। मंत्रालय के अनुसार, इन घटनाओं के पीछे तेज गति, चालक का ध्यान भटकना, मोड़ पर वाहन का नियंत्रण खोना और अचानक सामने किसी जानवर का आ जाना जैसे कारण शामिल हो सकते हैं।
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नई व्यवस्था का व्यापक उद्देश्य राजमार्गों पर यातायात को सुरक्षित बनाना, पशुओं को दुर्घटनाओं से बचाना और पशुपालकों की जवाबदेही तय करना है। इसके साथ ही प्रशासन को ऐसे संवेदनशील हिस्सों की लगातार निगरानी और आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
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