नई दिल्ली। UPI के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर 15 अक्टूबर 2026 से 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे ऐप्स और वेबसाइटों की चर्चा शुरू हो गई है, जो बड़े भुगतान को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर MDR से बचाने का दावा कर रहे हैं। इन ऐप्स के जरिए 1,999 रुपये से कम की कई अलग-अलग UPI पेमेंट कराने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि नया MDR ग्राहकों से वसूला जाने वाला UPI ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं है। मौजूदा घोषित व्यवस्था में पात्र मर्चेंट को 2,000 रुपये से अधिक के P2M (Person-to-Merchant) भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR देना होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पेमेंट-स्प्लिट सिस्टम को लेकर दावा किया जा रहा है कि यदि किसी मर्चेंट को 4,500 रुपये का भुगतान लेना है तो ऐप इस रकम को तीन हिस्सों में बांट सकता है। उदाहरण के तौर पर दो भुगतान 1,999-1,999 रुपये और तीसरा भुगतान 502 रुपये का हो सकता है।
इस तरह पूरा भुगतान तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन में लेने की बात कही जा रही है। ऐसे ऐप्स का इंटरफेस भी सामान्य तौर पर सरल बताया जा रहा है, जिसमें UPI ID, नाम और भुगतान की कुल राशि दर्ज करने के बाद रकम को छोटे हिस्सों में बांटने का विकल्प मिलता है।
नए नियम को लेकर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि MDR का भुगतान मर्चेंट को करना है, ग्राहक को नहीं। वित्त मंत्रालय की ओर से भी कहा गया है कि यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
इसके अलावा सभी मर्चेंट इस शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, सीधे बैंक खाते में UPI QR के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट MDR से बाहर रहेंगे। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला UPI भुगतान भी मुफ्त रहेगा।
किसी अनजान या अनवेरिफाइड वेबसाइट अथवा ऐप के जरिए भुगतान को कई हिस्सों में बांटना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर तब, जब ऐप UPI ID, मोबाइल नंबर, बैंकिंग संबंधी जानकारी या अन्य निजी विवरण मांग रहा हो।
किसी ऐप का यह दावा कि वह UPI के नियमों के तहत लगने वाले शुल्क से बचा सकता है, अपने आप में उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। पेमेंट से जुड़ी सेवा इस्तेमाल करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह आधिकारिक और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म है या नहीं।
नए MDR ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से पात्र P2M UPI लेनदेन पर 2,000 रुपये से अधिक की राशि के लिए 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये और उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क 300 रुपये तक सीमित रहेगा। वहीं व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
कुछ श्रेणियों, जैसे रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम और बीमा आदि के लिए अलग फ्लैट MDR व्यवस्था रखी गई है। इसलिए किसी भुगतान को सिर्फ 1,999 रुपये के हिस्सों में बांट देने से हर मामले में शुल्क समाप्त हो जाएगा, यह मानना सही नहीं है।
UPI चार्ज को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में किसी वायरल ऐप के जरिए भुगतान करने से पहले उसके डेवलपर, आधिकारिक स्रोत, ऐप की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना जरूरी है।
सबसे अहम बात यह है कि नया MDR ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। इसलिए केवल चार्ज से बचने के नाम पर किसी अनजान ऐप को अपनी UPI या बैंकिंग जानकारी देना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं माना जा सकता।
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