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MP: बालाघाट में बैगा बच्चों की मौतों पर बड़ा सवाल, सरकारी आंकड़ा 32, विधायक ने बताया 43

September 24, 2026

बालाघाट जिले के बैगा और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की लगातार मौतों ने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है. सरकारी आंकड़ों में 32 मौतें दर्ज हैं, जबकि विधायक ने 43 बच्चोंं की मौत का दावा किया है.

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा और आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों को लेकर सरकारी आंकड़ों और बैहर विधायक संजय उइके के दावे में बड़ा अंतर सामने आया है. जिला स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 32 बच्चों की मौत हुई है, जबकि विधायक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजे पत्र में पिछले करीब पांच महीनों में 43 बच्चों की मौत का दावा किया है. विधायक के अनुसार 28 मृत बच्चों के परिवारों को सहायता राशि मिल चुकी है, जबकि 15 परिवार अभी भी सहायता से वंचित हैं.

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि विधायक द्वारा बताए गए 43 के आंकड़े में बीमारी के अलावा अन्य कारणों से हुई बच्चों की मौतें भी शामिल हैं. विभाग के मुताबिक बीमारी से संबंधित मामलों में अब तक 32 बच्चों की मौत दर्ज हुई है.

विधायक ने मांगा श्वेतपत्र

विधायक संजय उइके ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बैहर-बिरसा क्षेत्र में बैगा बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं, कुपोषण, उपचार व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की स्थिति सार्वजनिक करने के लिए विस्तृत श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है. उन्होंने सभी मृत बच्चों की ग्रामवार और परिवारवार सूची जारी करने तथा पात्र परिवारों को समान रूप से सहायता राशि देने की मांग की है. इसके साथ ही वर्ष 2026 में बैगा बच्चों की गांववार और आयुवार मृत्यु संख्या, प्रत्येक मौत का आधिकारिक कारण, बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार की अवधि और कुपोषण की स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा है.

मीजल्स और मलेरिया के मामले मिले

स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में प्रभावित इलाकों में कई बीमारियों के मामले सामने आए हैं. विभाग के अनुसार सर्दी-खांसी और बुखार के 5,391 मरीज, मलेरिया के 1,027 मामले, दाने के साथ बुखार के 423 और चर्मरोग के 255 मरीज मिले हैं. 100 से अधिक मीजल्स सैंपल में 32 पॉजिटिव पाए गए. डेंगू और चिकनगुनिया के मामले भी सामने आए हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की मौतों को केवल मीजल्स से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. मलेरिया, उल्टी-दस्त, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी गंभीर स्थिति के पीछे हो सकते हैं.

42 हजार लोगों की स्क्रीनिंग

सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के अनुसार प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार घर-घर पहुंचकर जांच कर रही हैं. अब तक करीब 42 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 6,456 लोगों का उपचार किया गया है. विभाग ने 57 स्वास्थ्य टीमें और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 12 एंबुलेंस तैनात की हैं. करीब 130 बेड की व्यवस्था की गई है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 23 बच्चे अस्पताल में भर्ती थे, जबकि उपचार के बाद स्वस्थ हुए करीब 617 बच्चों को घर भेजा जा चुका है.

बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल

विधायक ने बैगा बहुल क्षेत्रों में बच्चों के टीकाकरण का गांववार विवरण भी मांगा है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 21 अगस्त से शुरू हुए मीजल्स टीकाकरण अभियान में 27,082 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है. 64 गांवों के 7,338 मकानों में कीटनाशक का छिड़काव और 44 गांवों के 8,610 घरों में फॉगिंग की गई है.

विधायक ने पानी, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, एंबुलेंस, पोषण, शिक्षा और रोजगार की स्थिति का भी पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है. अब पूरे मामले में 32 और 43 के आंकड़ों के अंतर पर निगाह है. ग्रामवार और परिवारवार रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों आंकड़ों में अंतर किन कारणों से है और प्रत्येक बच्चे की मौत की परिस्थितियां क्या थीं.

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