img-fluid

चुनाव आयोग के समर्थन में पूर्व अफसर, 124 पूर्व आईएएस-आईएफएस अधिकारियों का खुला पत्र

October 10, 2026

नई दिल्ली। पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 124 अधिकारियों के एक समूह ने नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) और मतदाता सूची में सुधार की उसकी ‘विशेष गहन समीक्षा’ (एसआईआर) प्रक्रिया का बचाव किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ रहा है, साथ ही अनियमितताओं के आरोप और इस प्रक्रिया को आयोग की तरीके पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व अधिकारियों का यह पत्र चुनाव आयोग का बचाव करता है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और नागरिक समाज के समूहों ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चिंताएं जताई हैं।

पत्र में नागरिकों से क्या कहा गया?
इस पत्र में लिखा, ‘हमने अपनी पूरी जिंदगी भारत के चुनावों को आयोजित करने या उनका अध्ययन करने में बिताई है। हमने वोटर लिस्ट तैयार कीं, पोलिंग पार्टियों को ट्रेनिंग दी, स्ट्रॉन्ग रूम सील किए और वोटों की गिनती की देखरेख की। हम किसी पार्टी से नहीं जुड़े हैं। हम इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि अब बिना किसी सबूत के हमारे चुनावों के लिए धांधली शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, और बार-बार ऐसा कहने से उस लोकतांत्रिक भरोसे को चोट पहुंचती है जो हम सभी का है।


  • बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देकर क्या कहा?
    पत्र में आगे लिखा गया है, ‘हम जानते हैं कि धांधली वाला चुनाव कैसा होता है। हमने उन दिनों में काम किया है जिनके बारे में आप सिर्फ फिल्मों में जानते हैं। बूथ पर कट्टा (देसी बंदूक), बाहुबली के गुर्गे, बैलेट बॉक्स में जबरदस्ती वोट भरना या उन्हें चुरा लेना, और वोटरों को लौटा देना।

    बूथ कैप्चरिंग इतनी आम बात थी कि 1989 में संसद ने इसे अपराध घोषित कर दिया। जब हिंसा हावी होती है, तो लोकतंत्र चुप हो जाता है। आज, बिहार, जो कभी बूथ कैप्चरिंग के लिए बदनाम था, वहां 2025 का चुनाव बिना किसी री-पोल (दोबारा मतदान) के हुआ, जो उसके इतिहास में पहली बार हुआ है। 1951 के बाद से सबसे ज्यादा वोटिंग हुई और महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले।

    इसके साथ ही लिखा कि सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है। आरोप लगाने वाले की जिम्मेदारी है कि वह उसे साबित करे। कानून इसके लिए तरीके बताता है। जैसे कि दस्तखत किए हुए घोषणा-पत्र के आधार पर वोटर लिस्ट पर आपत्ति जताना और हाई कोर्ट में चुनाव याचिकाएं दायर करना। प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया गया आरोप, जिसे कभी शपथ के साथ नहीं रखा गया, न तो परखा जा सकता है और न ही उसका जवाब दिया जा सकता है। शक चाहे कितना भी जोरदार क्यों न हो, वह सबूत नहीं होता।

    एसआईआर प्रक्रिया पर विवादित क्यों है?
    ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) को वेरिफाई और अपडेट करने की एक प्रक्रिया है। चुनाव आयोग ने सही वोटर लिस्ट बनाए रखने की जरूरत बताई है, जिसमें डुप्लिकेट एंट्रीज और मर चुके या स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए वोटरों के रिकॉर्ड को ठीक करना शामिल है।

    Share:

  • ज्ञानेश कुमार के के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मनीष सिसोदिया सहित कई आप नेता हिरासत में लिए गए

    Sat Oct 10 , 2026
    चंडीगढ़/नई दिल्ली । ज्ञानेश कुमार के के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान (During protest against Gyanesh Kumar) मनीष सिसोदिया सहित कई आप नेता हिरासत में लिए गए (Several AAP Leaders including Manish Sisodia were Detained) । मुख्य चुनाव आयुक्त (ईसीई) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (आप) के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved