
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मानसून (Monsoon) की विदाई के बाद भी बादलों की आवाजाही (Clouds Movement ) थम नहीं रही है। दिन में धूप और रात में ठंडक के बीच अब अगले चार दिन प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश (Storm and Rain) का असर देखने को मिलेगा। शुक्रवार को ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, मुरैना और शिवपुरी में बारिश का अलर्ट है। इसके बाद शनिवार से बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान है। ग्वालियर-चंबल के साथ उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी मौसम बिगड़ सकता है।
मौसम में इस बदलाव की वजह प्रदेश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश से एक ट्रफ गुजर रही है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश के अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 17 अक्टूबर को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बारिश हो सकती है। 18 और 19 अक्टूबर को भी कई इलाकों में इसका असर बना रहने का अनुमान है।
मानसून लौट गया, फिर क्यों बरस रहे बादल?
प्रदेश से मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो गया था। वहीं, 15 अक्टूबर को देश से मानसून की वापसी की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश हो रही है। गुरुवार को भी नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड और शिवपुरी में कहीं हल्की बारिश हुई तो कहीं बादल और आंधी वाला मौसम रहा। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह के मौसम का असर देखने को मिलता है। पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में भी यह रुझान सामने आया है। इस बार भी महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने और तेज धूप निकलने के बाद कई जिलों में बारिश हुई है। प्रदेश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।
अमरकंटक में सबसे कम तापमान, भोपाल में भी रात ठंडी
बारिश के बीच प्रदेश में रात का तापमान भी गिर रहा है। अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। शाजापुर में 17.4, भोपाल में 17.6 और इंदौर व बालाघाट के मलाजखंड में 17.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड हुआ। रायसेन और छिंदवाड़ा में यह 18 डिग्री रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 अक्टूबर के बाद रात में ठंड का असर और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के साथ तापमान में बदलाव भी महसूस होगा।
सामान्य से 1.5 इंच कम हुई मानसूनी बारिश
इस साल प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। जून से सितंबर के बीच कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 1.5 इंच कम बारिश हुई।पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी रही। जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण सीजन की शुरुआत में ही कमी बन गई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश से आंकड़ा सुधरा, लेकिन मानसून के बीच में दो बार लंबे अंतराल आने से बारिश की रफ्तार प्रभावित हुई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी तरह नहीं भर पाई।
25 जिलों में कोटा पूरा, 30 में अब भी कमी
मानसून के पूरे सीजन के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, इंदौर, देवास, हरदा, बैतूल, खंडवा, मंदसौर, नीमच, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। इस तरह मानसून के दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण असमान रहा। अब मानसून की विदाई के बाद सक्रिय मौसमी प्रणालियों से होने वाली बारिश का दौर जारी है, लेकिन इसका असर मुख्य रूप से अगले कुछ दिनों तक रहने का अनुमान है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved