
नई दिल्ली। रेलवे स्टेशन (Railway Station) के टिकट काउंटर (Ticket Counter) से टिकट खरीदकर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी बीमा की सुविधा मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रेलवे को निर्देश दिया है कि 27 अक्टूबर तक काउंटर टिकट पर बीमा उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को मामूली अतिरिक्त राशि देकर बीमा लेने का विकल्प मिलता है, लेकिन काउंटर से टिकट खरीदने वालों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है।
6 अक्टूबर को हुई सुनवाई में जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने ऑनलाइन और काउंटर टिकट के बीच इस अंतर पर सवाल उठाए। अदालत ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था, बजट के इस्तेमाल और ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने के काम में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
ऑनलाइन टिकट पर बीमा, काउंटर वालों को सुविधा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को थोड़ी अतिरिक्त रकम देकर बीमा लेने का विकल्प दिया जाता है, जबकि रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से टिकट खरीदने वालों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
पीठ ने इस अंतर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि काउंटर से टिकट खरीदकर यात्रा करने वाले यात्रियों की बड़ी संख्या के लिए भी बीमा की सुविधा उपयोगी हो सकती है। अदालत के मुताबिक, रेलवे को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन अब तक ठोस प्रगति नहीं हुई है। इसी के बाद रेलवे को 27 अक्टूबर तक इस दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
यदि रेलवे तय समयसीमा में व्यवस्था लागू करता है, तो काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी बीमा लेने का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए बीमा की शर्तें, कवरेज और आवेदन की प्रक्रिया रेलवे की ओर से स्पष्ट की जानी बाकी है।
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहे हैं।
अदालत ने सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए निर्धारित बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक के किनारे फेंसिंग यानी बाड़ लगाने के लक्ष्य को पूरा करने में हर साल करीब एक-तिहाई की कमी का जिक्र किया गया।
पीठ ने रेलवे से पूछा कि जब यात्रियों की सुरक्षा के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं, तो उन्हें निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है। अदालत की चिंता इस बात को लेकर भी थी कि सुरक्षा संबंधी योजनाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर क्यों बना हुआ है।
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की पेशी पर फिलहाल रोक
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। अदालत चाहती थी कि अधिकारी रेलवे ट्रैक की फेंसिंग का लक्ष्य लगातार पूरा नहीं होने के कारणों पर जवाब देने के लिए तैयार रहें।
हालांकि, आदेश लिखवाए जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने अदालत से एक और मौका देने का अनुरोध किया। उन्होंने पिछले साल किए गए काम, फेंसिंग का लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारणों और भविष्य की कार्ययोजना के संबंध में हलफनामा दाखिल करने की पेशकश की।
केंद्र सरकार की इस गुजारिश के बाद रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी गई। अब रेलवे को हलफनामे के जरिए सुरक्षा संबंधी कार्यों की प्रगति और आगे की योजना का विवरण देना होगा।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
फिलहाल ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त राशि देकर बीमा लेने का विकल्प मिलता है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यह विकल्प मिल सकता है। इससे टिकट खरीदने के दोनों तरीकों के बीच बीमा सुविधा का अंतर कम हो सकता है।
हालांकि, काउंटर टिकट पर बीमा किस तरह उपलब्ध कराया जाएगा, इसके लिए कितनी राशि देनी होगी और बीमा के तहत कितना कवरेज मिलेगा, यह रेलवे की ओर से तय व्यवस्था पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इसे लागू हो चुकी सुविधा के बजाय रेलवे को दिया गया निर्देश समझना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। रेलवे को हलफनामे में अब तक किए गए कार्यों और भविष्य की योजना का ब्योरा देना है। अदालत यह भी देखेगी कि रेलवे सुरक्षा से जुड़े निर्देशों पर जमीनी स्तर पर कितनी प्रगति हुई है।
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