
जबलपुर। जिले के शासकीय अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। रांझी स्थित सिविल अस्पताल में महज 3 डॉक्टरों के भरोसे रोजाना 800 से 1000 मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नवीन कोठारी के अनुसार विक्टोरिया जिला अस्पताल में करीब 18 ड्यूटी डॉक्टरों और संजीवनी क्लीनिकों में 37 डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं। सिविल सर्जन ने भी कलेक्टर को विधिवत पत्र भेजकर रिक्त विशेषज्ञ पदों की जानकारी दी है। चिकित्सकों की कमी के चलते लंबी कतारों में लगे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे मजबूरन आम जनता को निजी नर्सिंग होम की शरण लेनी पड़ती है।
निजी क्लीनिकों की भारी फीस से टूटी गरीब की कमर
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में समुचित चिकित्सा प्रबंधन न होने से गरीब तबके को सबसे अधिक आर्थिक व मानसिक क्षति उठानी पड़ रही है। शासकीय चिकित्सालयों की दुर्दशा के बीच आसपास खुले निजी अस्पतालों में लोगों को जाने पर विवश होना पड़ता है। इन निजी संस्थानों में इलाज के नाम पर भारी भरकम फीस वसूली जाती है, जिसका बोझ निर्धन परिवारों के लिए असहनीय साबित हो रहा है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण मरीज अधूरा इलाज कराकर लौटते हैं अथवा दोबारा सरकारी पर्ची पर आकर घंटों खड़े रहने को मजबूर होते हैं। प्रशासनिक स्तर पर अब तक नए चिकित्सकों की नियुक्तियों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कलेक्टर से की गई तत्काल नई नियुक्तियों की मांग
स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली को सुधारने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नवीन कोठारी ने जिला प्रशासन को पूरी स्थिति से अवगत कराया है। विक्टोरिया अस्पताल एवं संजीवनी स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 55 रिक्तियों की पूर्ति तत्काल करने की सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जब तक रिक्त पदों पर स्थाई या संविदा आधार पर नए चिकित्सकों की तैनाती नहीं होगी, तब तक ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में मरीजों की दुर्दशा समाप्त नहीं हो सकती। प्रशासनिक संज्ञान के अभाव में सरकारी दावों के बावजूद धरातल पर मरीज उचित उपचार पाने के लिए रोज संघर्ष कर रहे हैं।
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