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महाकाली के विसर्जन से खाकी नदारद!

October 27, 2026

  • पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही से लोग हुए नाराज,आला अधिकारियों की चुप्पी पर उठे कई गंभीर सवाल,भोपाल पहुंचेगी शिकायत

जबलपुर। संस्कारधानी के प्रसिद्ध पड़ाव वाली महाकाली की प्रतिमा के विसर्जन समारोह में उमड़ी भारी भीड़ के बीच स्थानीय पुलिस प्रशासन का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना साबित हुआ। विसर्जन मार्ग पर हजारों श्रद्धालु चल रहे थे, लेकिन सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मैदानी स्तर पर एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं दिखाई दिया। जगह-जगह अव्यवस्था, जाम और भगदड़ जैसी विकट परिस्थितियां निर्मित होने के बावजूद आला अफसरों ने इस विशाल धार्मिक आयोजन को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। सुरक्षा का ऐसा अभाव देखकर नागरिकों, श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों में गहरा असंतोष फैल गया। लोगों का कहना है कि इतने संवेदनशील और विशाल जनसमूह वाले कार्यक्रम में किसी सिपाही तक की मौजूदगी न होना जनसुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है। इसी आक्रोश के चलते अब मामले की औपचारिक शिकायत भोपाल स्तर पर पुलिस मुख्यालय के सर्वोच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।


  • चौक-चौराहों पर मची रही अफरा-तफरी
    विसर्जन चल समारोह जब अपने तय मार्गों से गुजरा, तब श्रद्धालुओं के सैलाब के सामने व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं। मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और पैदल चलने वालों तक को भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई संवेदनशील मोड़ों पर स्थिति बेकाबू होने की कगार पर पहुंच गई थी। आम नागरिकों ने स्वयं ही आगे आकर रास्ता साफ कराने का प्रयास किया, जबकि ऐसे मौकों पर पहले से पर्याप्त बल, बैरिकेडिंग और पेट्रोलिंग वाहनों की तैनाती अनिवार्य मानी जाती है। सुरक्षा तंत्र का यह अभाव आम जनता के लिए बेहद डरावना रहा, क्योंकि मामूली सा टकराव भी बड़े संकट को जन्म दे सकता था।

    कार्यशैली से नाराज श्रद्धालु करेंगे भोपाल में शिकायत
    धार्मिक आयोजनों को लेकर कागजों में बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने वाले स्थानीय पुलिस अधिकारी असल मौके पर पूरी तरह विफल साबित हुए। मौके पर उपस्थित लोगों ने सवाल उठाया कि शहर के सबसे बड़े विसर्जन कार्यक्रमों में शुमार इस पर्व पर निगरानी रखने के लिए कोई योजना क्यों नहीं बनाई गई। उच्च अधिकारियों द्वारा जमीन पर उतरकर मुआयना न करना उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घोर अनदेखी को जनहित के विरुद्ध मानते हुए तय किया गया है कि पूरे घटनाक्रम के साक्ष्य, वीडियो फुटेज और विस्तृत विवरण सीधे मध्य प्रदेश पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के वरिष्ठ अफसरों को भेजे जाएंगे।

    किसके सिर जाती हादसे की जिम्मेदारी
    त्योहारों के दौरान अनहोनी की आशंका हमेशा बनी रहती है, खास तौर पर जब जनसमूह अनियंत्रित होकर आगे बढ़ रहा हो। यदि उस समय कोई असामाजिक तत्व उपद्रव करता या बिजली के तारों व संकरी गलियों में जरा भी भगदड़ मचती, तो हालात संभालना नामुमकिन हो जाता। बिना किसी सुरक्षा घेरे के इतनी लंबी दूरी तय करना अपने आप में एक बड़ा जोखिम था। लोगों ने राहत की सांस ली कि ईश्वर की कृपा से कोई जानलेवा अनहोनी नहीं घटी, किंतु यह तय है कि प्रशासनिक अमले ने नागरिकों की सुरक्षा को पूरी तरह भाग्य के भरोसे छोड़ दिया था।

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