
बेंगलुरु. कर्नाटक (Karnataka) के मंत्री (Minister) सतीश जारकीहोली (Satish Jarkiholi) ने वोटर लिस्ट (Voter List) के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कर्नाटक में इस प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में SIR सही तरीके से किया गया. जारकीहोली ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध कर्नाटक में SIR को लेकर नहीं था, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए थे.
करीब एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर जारकीहोली ने कहा कि ये ऐसे लोग थे, जिनकी मौत हो चुकी थी, जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए थे या जिनके नाम वोटर लिस्ट में एक से ज्यादा बार दर्ज थे. उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी.
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कर्नाटक में कांग्रेस मंत्री सतीश जरकीहोली के SIR का समर्थन करने को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे कांग्रेस के नेता खुद SIR को लेकर राहुल गांधी के रुख को उजागर कर रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि SIR का विरोध लोकतंत्र के खिलाफ है.
‘कर्नाटक में सही तरीके से हुआ SIR’
सतीश जारकीहोली ने कहा कि कर्नाटक में SIR को लेकर विरोध नहीं किया गया था. उन्होंने दूसरे राज्यों में इस प्रक्रिया को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाने की बात कही. उनके मुताबिक, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में SIR के दौरान जो मुद्दे सामने आए, वे उनके विरोध की वजह थे.
मंत्री ने कहा कि कर्नाटक में विरोध और लोगों को दी गई ट्रेनिंग का असर हुआ. इससे राज्य में SIR की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की जा सकी. उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में भी इसी तरह प्रक्रिया को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए था.
‘मृत, शिफ्टेड और डुप्लीकेट नाम हटाए गए’
जब जारकीहोली से पूछा गया कि करीब एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाना सही था या नहीं, तो उन्होंने कहा कि हटाए गए नामों में मृत लोगों, दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं और डुप्लीकेट एंट्री वाले लोगों के नाम शामिल थे.
कांग्रेस के मंत्री ने कहा कि इस तरह की जांच दूसरे राज्यों में भी होनी चाहिए थी. उनके मुताबिक, कर्नाटक में मतदाता सूची की जांच सही तरीके से की गई, जबकि दूसरे राज्यों में SIR की प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियां थीं.
सतीश जारकीहोली के बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि उनका विरोध SIR की प्रक्रिया से नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में इसे लागू करने के तरीके से था. उन्होंने कर्नाटक में हुए SIR को सही बताते हुए कहा कि दूसरे राज्यों में भी इसे इसी तरह किया जाना चाहिए था.
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