
उज्जैन। शहर के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प करने के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) 643.39 करोड़ रुपए का कर्ज लेगा। इसके लिए बीते दिन इंडियन ओवरसीज बैंक और यूडीए के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा 200 करोड़ रुपए के टेंपल बॉण्ड जारी करने की तैयारी है। उल्लेखनीय है कि कालभैरव, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम सहित 11 परियोजनाओं पर करीब 1120 करोड़ रुपए खर्च करने की उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा योजना बनाई गई है।
ऐसे समझें टेंपल बॉण्ड का गणित
टेंपल बॉण्ड को आसान भाषा में समझें तो यह विकास कार्यों के लिए पैसा जुटाने का एक तरीका है। इसमें बॉण्ड जारी कर निवेशकों से राशि जुटाई जाती है और तय शर्तों के अनुसार उसका भुगतान किया जाता है। यह मंदिरों में मिलने वाला दान नहीं, बल्कि वित्त जुटाने की अलग व्यवस्था है।
कालभैरव-मंगलनाथ पर 288 करोड़ से ज्यादा
11 प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे अधिक 217.51 करोड़ रुपए श्रीकृष्ण विराट रूप परियोजना पर खर्च करने की योजना है। इसके बाद सांदीपनि आश्रम के विकास पर 163.55 करोड़ और कालभैरव मंदिर पर 164.50 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। मंगलनाथ मंदिर के लिए 123.90 करोड़ तथा शनि और नवग्रह मंदिरों के विकास के लिए 120.40 करोड़ रुपए रखे गए हैं। भूखी माता मंदिर पर 106.57 करोड़, बगलामुखी माता मंदिर पर 85 करोड़ और अंगारेश्वर मंदिर पर 83 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है। इसके अलावा 84 महादेव मंदिरों के लिए 30 करोड़, गढ़कालिका माता मंदिर के लिए 15.51 करोड़ और सिद्धवट घाट व संबंधित कार्यों के लिए 14.58 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं में मंदिर परिसरों का विकास, दर्शन व्यवस्था में सुधार, पार्किंग, आवागमन और प्रकाश व्यवस्था जैसे काम शामिल हैं।
दान से नहीं, परियोजनाओं की कमाई से चुकाएंगे कर्ज
इस वित्तीय योजना में सबसे अहम सवाल कर्ज चुकाने का है। यूडीए के अनुसार, किस्त और ब्याज चुकाने के लिए संबंधित विकास परियोजनाओं से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि परियोजनाओं से होने वाली कमाई पर्याप्त नहीं हुई तो बाकी भुगतान यूडीए को अपनी ओर से करना होगा। मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से मिलने वाली दान राशि को कर्ज की अदायगी से अलग रखा गया है। इसका इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों और निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। मंदिरों की संपत्ति भी कर्ज की सुरक्षा के तौर पर नहीं रखी जाएगी।
केंद्र से 307 करोड़ की सहायता का दावा
यूडीए की वित्तीय योजना में बैंक कर्ज के अलावा सरकारी सहायता भी शामिल है। अर्बन चैलेंज फंड के तहत करीब 281 करोड़ रुपए की सहायता स्वीकृत बताई गई है। टेंपल बॉण्ड जारी होने के बाद करीब 26 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी मिलने की संभावना है। दोनों को मिलाकर केंद्र से करीब 307 करोड़ रुपए की सहायता का अनुमान है। उल्लेखनीय है कि सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए मंदिरों में सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन अब इस योजना की असली परीक्षा निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने और कर्ज चुकाने के लिए तय वित्तीय व्यवस्था को जमीन पर उतारने में होगी।
निवेशकों के भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं
यूडीए 200 करोड़ रुपए के टेंपल बॉण्ड लाने की तैयारी में है। इससे मिलने वाली रकम तय विकास परियोजनाओं पर खर्च करने का प्रस्ताव है। हालांकि, बॉण्ड कब जारी होंगे, निवेशकों को भुगतान की शर्तें क्या होंगी और इसकी अवधि कितनी होगी, इसकी जानकारी उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा नहीं दी गई है। यूडीए का कहना है कि बैंक कर्ज और बॉण्ड के लिए किसी मंदिर की चल-अचल संपत्ति को गिरवी नहीं रखा गया है। वित्तीय व्यवस्था प्राधिकरण की अपनी आर्थिक साख और संपत्तियों के आधार पर की जा रही है।
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