
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly elections) के लिए अपनी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. नई दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के आवास पर शुक्रवार को आयोजित पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की एक उच्च स्तरीय बैठक में भावी उम्मीदवारों के नामों और चुनावी रणनीति पर गहन मंथन हुआ. इस महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली से अरविंद केजरीवाल के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, राज्य के चुनाव प्रभारी मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और जैस्मीन शाह व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे.
वहीं, जमीनी फीडबैक और इनपुट साझा करने के लिए पंजाब के आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अमन अरोड़ा और राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस रणनीतिक चर्चा का हिस्सा बने. बैठक के तुरंत बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आधिकारिक घोषणा की कि 31 अक्टूबर (शनिवार) को एक बार फिर PAC की बैठक होगी, जिसके तुरंत बाद आम आदमी पार्टी अपने उम्मीदवारों की पहली सूची सार्वजनिक कर देगी.
उम्मीदवारों की घोषणा जल्दी क्यों?
दरअसल, आम आदमी पार्टी आचार संहिता लागू होने और चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा से काफी पहले ही अपने उम्मीदवार मैदान में उतारना चाहती है, ताकि प्रत्याशियों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार करने और पैठ मजबूत करने का पर्याप्त समय मिल सके.
एंटी-इनकंबेंसी को कम करने का प्लान
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी राज्य में एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए बेहद कड़े कदम उठाने जा रही है. इसके तहत 40 से 45 सीटिंग विधायकों के टिकट काटने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, ताकि नए और बेदाग चेहरों को मौका देकर दोबारा सत्ता हासिल करने की राह आसान की जा सके. जिन विधायकों के टिकट कटने की तलवार लटकी है, उनका चयन क्षेत्र में उनकी सक्रियता, जनता के बीच लोकप्रियता और पार्टी द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है.
विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देगी AAP
विपक्ष द्वारा पंजाब में ये नैरेटिव सेट करने का प्रयास किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी सत्ता में वापस नहीं लौट सकती है. इसी नैरेटिव का जवाब देने के लिए पार्टी के बड़े चेहरे जो लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं और पार्टी में जिनका राजनीतिक कद काफी बड़ा है, उन्हें शनिवार को आने वाली पहली लिस्ट में एक बार फिर से टिकट देकर पार्टी ये संदेश देना चाहती है कि विपक्ष के नैरेटिव की उन्हें परवाह नहीं है और आम आदमी पार्टी मजबूती से पंजाब में दोबारा सत्ता में आने के लिए पूरी तरह से तैयार है.
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