
नई दिल्ली ।दिवाली (Diwali) हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन घरों और दुकानों में दीप जलाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व पर मां लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) की पूजा का विशेष महत्व है। हालांकि, दिवाली के अवसर पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश (Lord Ganesha) की पूजा भी की जाती है। साल 2026 में दिवाली का पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। धार्मिक परंपरा (Religious Tradition) के अनुसार, इस दिन दोनों देवी-देवताओं की एक साथ आराधना की जाती है। इसके पीछे केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि एक विशेष धार्मिक मान्यता (Religious Belief) और पौराणिक कथा भी प्रचलित है।
हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। भक्त उनकी पूजा करके जीवन में आर्थिक संपन्नता और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों के आरंभ का देवता माना जाता है। उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जीवन में केवल धन का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से उपयोग करना भी जरूरी है। धन को संभालने, सही फैसले लेने और उसका सदुपयोग करने के लिए बुद्धि और विवेक की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भक्त लक्ष्मीजी से धन और समृद्धि तथा गणेशजी से सद्बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद मांगते हैं।
मां लक्ष्मी और गणेशजी से जुड़ी पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यता के पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा भी है। कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी को अपने धन और वैभव पर अभिमान हो गया था। उन्हें लगता था कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति उनकी कृपा प्राप्त करना चाहता है। तब भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि भले ही संसार में सभी लोग उनकी आराधना करते हैं, लेकिन मातृत्व के बिना उनका जीवन अधूरा है। भगवान विष्णु की यह बात सुनकर मां लक्ष्मी दुखी हो गईं।
मां लक्ष्मी की उदासी देखकर माता पार्वती ने अपने पुत्र भगवान गणेश को उनकी गोद में बैठा दिया। इससे मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुईं और उन्होंने भगवान गणेश को अपना पुत्र स्वीकार कर लिया। मान्यता है कि इसके बाद मां लक्ष्मी ने वरदान दिया कि जो भी भक्त उनकी पूजा करेगा, उसे भगवान गणेश की आराधना भी करनी होगी। तभी उसे दोनों देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसी कथा को दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का भी है महत्व
भगवान गणेश की पूजा के साथ रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ की मान्यता भी जुड़ी हुई है। धार्मिक परंपरा में रिद्धि और सिद्धि को भगवान गणेश की पत्नियां माना जाता है। रिद्धि को समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है, जबकि सिद्धि सफलता और उपलब्धियों से जुड़ी हैं। इसी तरह शुभ और लाभ को रिद्धि-सिद्धि का पुत्र माना जाता है। शुभ का अर्थ मंगल, कल्याण और अच्छी शुरुआत से है, जबकि लाभ का संबंध फायदे, उन्नति और तरक्की से है।
यही कारण है कि दिवाली के अवसर पर कई लोग अपने घरों, दुकानों और पूजा स्थलों के प्रवेश द्वार पर शुभ-लाभ लिखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करना मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इस प्रकार दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करने का उद्देश्य धन के साथ बुद्धि और विवेक के महत्व को भी समझना है। धार्मिक मान्यताओं में यह परंपरा संदेश देती है कि जीवन में समृद्धि के साथ सही सोच और धन का उचित उपयोग भी जरूरी है।
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