
नई दिल्ली । बद्रीनाथ (Badrinath) के पास हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे (Helicopter Accident) के बाद विमानन सुरक्षा (Aviation Safety) को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के दौरान संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए अब प्रत्येक हेलीकॉप्टर में दो पायलटों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। नया नियम 2 नवंबर से लागू किया गया है। हालांकि, इस फैसले को लेकर हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों (Helicopter Operators) ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व चर्चा के लागू किए गए इस नियम से परिचालन लागत बढ़ेगी और मौजूदा व्यवस्था के तहत सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
ऑपरेटरों ने इस फैसले पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए संबंधित विमानन और उत्तराखंड प्रशासनिक प्राधिकरण को पत्र भेजा है। उन्होंने मांग की है कि दो पायलट रखने की अनिवार्यता पर दोबारा विचार किया जाए। ऑपरेटरों का कहना है कि नियम लागू करने से पहले उनसे बातचीत नहीं की गई, जबकि इसका सीधा असर उनके व्यावसायिक संचालन और आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाला है।
हेलीकॉप्टर कंपनियों के मुताबिक, प्रत्येक उड़ान में दो पायलट तैनात करने से कर्मचारियों पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा। दूसरे पायलट के वेतन के अलावा उसके रहने, आने-जाने और अन्य व्यवस्थाओं पर भी अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ेगा। इससे चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन पहले की तुलना में महंगा हो सकता है।
ऑपरेटरों ने यह भी कहा है कि वर्तमान चार्टर किराये और सीमित मुनाफे को देखते हुए इन अतिरिक्त खर्चों को वहन करना आसान नहीं होगा। उनका मानना है कि बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए यात्रियों से अधिक किराया लेना भी उचित विकल्प नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वे अब तक निर्धारित विमानन नियमों का पालन करते हुए हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित करते रहे हैं।
ऑपरेटरों ने स्पष्ट किया है कि वे दो पायलटों की अनिवार्यता वाले नए नियम को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार नहीं किया गया और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया तो 2 नवंबर से चारधाम यात्रा की चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद की जा सकती हैं। इससे यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जल्द बैठक बुलाने और सभी पक्षों की सहमति से समाधान निकालने की अपील की है। ऑपरेटरों का कहना है कि विमानन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन नियम बनाते समय परिचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और आर्थिक पहलुओं पर भी विचार किया जाना जरूरी है। उनका आग्रह है कि ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो और हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन भी बाधित न हो।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में 30 अक्टूबर को हुआ हेलीकॉप्टर हादसा है। शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजकर 15 मिनट पर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर VT-HCX बद्रीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हाथी पर्वत के पास स्वारी खर्क में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह स्थान पांडुकेश्वर के ऊपर जोशीमठ घाटी में स्थित है।
हेलीकॉप्टर में कुल छह लोग सवार थे। इनमें कर्नाटक के पांच श्रद्धालु और दिल्ली निवासी पायलट कैप्टन हिमांशु शामिल थे। दुर्घटना में सभी छह लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया तथा सभी मृतकों के शव बरामद किए गए। इस घटना ने चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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