
जबलपुर। सिख धर्म के चतुर्थ गुरु रामदास साहिब का पवित्र प्रकाशोत्सव समारोह गुरुद्वारा अधारताल मैदान में उमंग, उल्लास और आस्थापूर्वक मनाया गया । इस मौके पर लगे भव्य कीर्तन दरबार में स्वर्ण मंदिर श्री अमृतसर, पंजाब के विख्यात हुजूरी रागी जत्था भाई गुरजिंदर सिंघ खुशदिल, गुरुवाणी मीमांसाक ज्ञानी जगजीत सिंह जाचक, लखनऊ, उ.प्र., भाई इंदर सिंह, भाई सतनाम सिंह स्त्री सत्संग सभा अधारताल सहित विभिन्न विद्वतजनों ने गुरुवाणी शबद कीर्तन एवं गुरुवाणी मीमांसा के साथ साध संगत को रसविभोर किया।
यहां वक्ताओं ने कहा कि 1574 में गुरु रामदास जी ने विश्वप्रसिद्ध अमृतसर नगर की स्थापना की और पवित्र अमृतसर सरोवर का निर्माण करवाया जहां बाद में गुरु अर्जनदेव जी ने स्वर्ण मंदिर की स्थापना करवाई । आज यह विश्व सिक्खों का सर्वोच्च धार्मिक आस्था का केंद्र है । उन्होंने 30 रागों में 638 इलाही गुरुवाणी शबद की रचना भी की जिसे गुरु ग्रंथ साहिब में शिद्दत से शामिल किया गया है। उन्होंने सिख विवाह पद्धति आनन्द कारज की रचना कर एक नई और सरल वैवाहिक की शुरुआत भी की। धन धन रामदास गुरु, जिनी सिरिया तिनै सवारिया तथा गुरु रामदास नू मिलन बधाइयां जैसे हृदयस्पर्शी गुरुवाणी शबद सुनकर श्रद्धालुजन सतनाम वाहेगुरु का जाप करते हुए आत्मविभोर हो गए । गुरु का लंगर दिनभर वितरित किया जाएगा । इस अवसर पर प्रधान सरदार हरमिंदर सिंह सैनी ने महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, पूर्व मंत्री हरेंद्र जीत सिंह बब्बू, अंचल सोनकर पार्षद श्रीमती,,,,,एवं दलवीर सिंह जस्सल सहित विभिन्न सेवादारों को सम्मानित किया। इस दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्पूर्ण अखण्ड पाठ भी संपन्न करवाये गए। कड़ाह प्रसाद वितरण के साथ ही सोल्लास समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन रणजीत सिंह गुगली एवं आभार प्रदर्शन प्रधान हरमिंदर सिंह सैनी ने किया ।