
उज्जैन। शहर में चल रहे निर्माण कार्य, मौसम में ठंडक के साथ ही दीपावली के त्योहार की तैयारी और साफ-सफाई के चलते शहर में धूल और प्रदूषण का असर भी लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। घरों में साफ-सफाई के दौरान उडऩे वाली धूल, सड़कों पर धूल के गुबार और बदलते मौसम के कारण एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। चरक अस्पताल सहित टीबी व अन्य अस्पतालों में भी 30 से 40 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
सफाई के दौरान उड़ती धूल बन रही परेशानी
मौसम में बदलाव के साथ घरों में साफ-सफाई का दौर भी शुरू हो गया है। इस दौरान पुराने सामान, पर्दे, गद्दे, कालीन और घर के कोनों में जमा धूल उड़कर हवा में फैलती है। इसमें मौजूद धूल के कण एलर्जी और अस्थमा से पीडि़त लोगों के लिए परेशानी बढ़ा रहे हैं। जिन लोगों को पहले से सांस संबंधी समस्या है, उनमें इसके लक्षण अधिक उभरकर सामने आ रहे हैं। वहीं, कई लोगों को पहली बार एलर्जी की शिकायत हो रही है। शहर की सड़कों पर उड़ती धूल और ट्रैफिक के बीच लंबे समय तक रहने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। खासकर टू व्हीलर से सफर करने वालों को धूल और प्रदूषण का सीधा सामना करना पड़ता है। सुबह-शाम ठंडक बढऩे से सांस संबंधी परेशानी और बढ़ सकती है।
डॉक्टरों की सलाह- सफाई के दौरान लगाएं मास्क
डॉक्टरों ने घरों की सफाई करते समय मास्क लगाने, धूल उडऩे से बचने और कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखने की सलाह दी है। अस्थमा के मरीज अपनी निर्धारित दवाएं नियमित लें और ठंडी हवा व धूल के सीधे संपर्क से बचें। यदि दो से तीन सप्ताह तक खांसी बनी रहती है, सांस लेने में परेशानी होती है या लगातार छींक और नाक बहने की शिकायत है तो चिकित्सकीय परामर्श जरूर लें।
350 मरीजों के विश्लेषण में 40 प्रतिशत को एलर्जी- अस्थमा
डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने पिछले 14 महीनों में 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के करीब 350 शहरी मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें लगभग 40 प्रतिशत यानी 120 से 150 मरीजों में एलर्जी और अस्थमा से जुड़े लक्षण मिले। उनके अनुसार, रोजाना लंबा सफर करने वाले कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों में नाक, साइनस और सांस संबंधी शिकायतें अधिक देखने को मिलीं। टू व्हीलर से सफर करने वालों के अलावा कार में लंबे समय तक रहने वालों को भी परेशानी हो सकती है। कार का एसी, परफ्यूम और वाहन का ठीक से रखरखाव नहीं होना भी एलर्जी के संभावित कारण हैं।
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