
अब पंछी पिंजरे में फड़फड़ाएगा विध्वंस की उड़ान भर न पाएगा…
समरथ को नहीं दोष गुसाईं… घर बिठाते देर न लगाई… लोकतंत्र की यही दुहाई… तुगलकी ट्रंप पर लगाम लगाई…जनता के वोटों की जीत को अपनी सल्तनत समझने वाले ऐसे शासकों का यही अंजाम होता है…और अमेरिका जैसे देश में तो राष्ट्रपति को पंगू बनाने का मौका दो साल में ही मिलता है…जनता को फैसला बदलने और सिरफिरे के हाथों से फैसलों का अधिकार छीनने में समय नहीं लगता है…अपनी दो साल की सल्तनात में ही ट्रंप ने अमेरिका तो अमेरिका, पूरी दुनिया को इतना हैरान-परेशान कर दिया कि जो लोग समझते थे कि अमेरिका में क्या हो रहा है, उससे हमें क्या लेना-देना, वो मान गए कि बंदर के हाथ उस्तरा लग जाए तो वो अपने देश की ही नहीं, दुनिया की हजामत कर सकता है…हथियारों के जखीरों पर दुनिया का चौधरी बन बैठा अमेरिका ईरान को नसीहत देना चाहता है…उसके परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाना चाहता है और उसके लिए भी हथियारों की ही ताकत आजमाना चाहता है…ईरान से इधर बातचीत का दौर चलाता है और उधर उनके धार्मिक नेता और देश के सर्वोच्च नेता खामेनेई सहित अनेक नेताओं पर बम दागकर उन्हें धोखे से मार डालता है… ईरान की निरपराध जनता पर बम बरसाता है…आसपास के देशों को मोहरा बनाता है… उनके एयरबेस का इस्तेमाल कर उन्हें भी आफत में डालता है…अपने आपको सबसे बड़ा दिमाग वाला मानता है और इजराइल की चाल में फंसकर अपने ही देश को मोहरा बना डालता है…खुद ट्रंप कहलाता है, लेकिन जोकर जैसी हरकतें करते हुए नोबल पुरस्कार मांगता है… दुनियाभर से देश में आए हुए टैलेंट पर वीजा नियम थोपकर उन्हें निकालकर अपने देश को आगे बढ़ाना चाहता है…दूसरे देशों के आयात-निर्यात पर टैरिफ लगाकर अपने देश में महंगाई बढ़ाना चाहता है…यानी सीढ़ी हटाकर मंजिल पर चढ़ना चाहता है…बेचारे अमेरिकी भी अपनी अक्ल पर पड़े पत्थरों के चलते उसे चुनने की गलती पर मन मसोस रहे थे और बढ़ती महंगाई, गिरती ऊंचाई भांपकर मौके की तलाश कर रहे थे…उनके लोकतंत्र ने उन्हें दो साल में ही मौका देकर उसे भुनाने में देर न लगाई…उड़ते ट्रंप पर लगाम लगाई…अब तुगलक कोई फैसला नहीं ले पाएगा…हर दिन एक नया राग नहीं अलाप पाएगा…इधर धमकाएगा, उधर बम बरसाएगा और शांतिदूत का तमगा खुद अपने सर पर लगाएगा…और एक पिद्दी-से ईरान देश से हर दिन मात खाएगा…ट्रंप ने अमेरिका का वो कबाड़ा किया, जो कोई अमेरिकी राष्ट्रपति न कर पाया…सदियों से अपनी ताकत का डंका बजाने वाले अमेरिका की बंद मुट्ठी खुल गई… हाथों की ताकत रेत बनकर बिखर गई…
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