
हरिद्वार। करीब 18 दिनों के इंतजार के बाद हरिद्वार (Haridwar) में गंगा (Ganga) की धारा फिर से बहने लगी है। दशहरे की रात शुरू हुई गंगा की वार्षिक बंदी समाप्त होने के बाद 7 नवंबर की रात गंग नहर में दोबारा पानी (Water) छोड़ा गया। इसके साथ ही हर की पौड़ी सहित शहर के सभी गंगा घाटों पर जल प्रवाह शुरू हो गया। दिवाली से ठीक पहले गंगा का पानी लौटने से घाटों की रौनक भी फिर से बढ़ गई है।
हरिद्वार में परंपरागत रूप से हर साल दशहरे से दिवाली तक गंगा की वार्षिक बंदी की जाती है। इस दौरान गंग नहर में पानी का प्रवाह रोककर सफाई और मरम्मत के काम पूरे किए जाते हैं। इस वर्ष भी दशहरे की रात से यह प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो लगातार 18 दिनों तक चली।
21 अक्टूबर को हर की पौड़ी पर गंगा का पानी पूरी तरह बंद था। ऐसे में वहां पहुंचे कई श्रद्धालुओं को स्नान किए बिना लौटना पड़ा था। कुछ श्रद्धालुओं ने गंगाजल का आचमन कर अपनी आस्था व्यक्त की थी। अब पानी छोड़े जाने के बाद घाटों पर फिर से स्नान और धार्मिक गतिविधियां शुरू हो सकेंगी।
नहर की सफाई के साथ अर्धकुंभ की तैयारियां
गंगा की वार्षिक बंदी के दौरान गंग नहर में जमा सिल्ट यानी मिट्टी और गाद निकाली गई। इसके अलावा नहर की मरम्मत से जुड़े काम भी किए गए। इस बार बंदी का उपयोग अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों के लिए भी किया गया। इसके तहत गंगा घाटों के निर्माण सहित अन्य कार्य पूरे किए गए। इस दौरान करीब तीन किलोमीटर लंबे गंगा घाट का निर्माण कार्य भी किया गया।
हर साल तय अवधि में रोका जाता है पानी
हरिद्वार में गंगा की वार्षिक बंदी के दौरान नहर की सफाई, गाद निकालने और मरम्मत जैसे जरूरी काम किए जाते हैं। काम पूरा होने के बाद निर्धारित समय पर पानी दोबारा छोड़ा जाता है। इस बार 7 नवंबर की रात 18 दिनों बाद गंगा में जल प्रवाह बहाल किया गया। इसके साथ ही हर की पौड़ी सहित हरिद्वार के सभी गंगा घाटों पर फिर से पानी पहुंच गया है।
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