
49 वर्षों का विश्वास और 50वें बरस का सफर… एक युग की यात्रा… स्नेह भरा पड़ाव… विश्वास की पूंजी… अपनों का साथ… लाखों पाठकों का प्यार, क्या कुछ नहीं है हमारे पास… हम निर्भीक रहे… हम निडर रहे… हम अपनत्व से भरे रहे… हमने इस शहर को बढ़ते देखा… हमने इस शहर को संवरते देखा… कई नजरें हमसे जुड़ी रहीं… हमने उन नजरों को परखते देखा… आज से 49 वर्ष पूर्व एक सपना बनकर अपने जन्मदाता स्व. श्री नरेशचन्दजी चेलावत की आंखों में पलने वाला अग्निबाण आज उनकी धडक़न बनकर अपने हाथों में, आपकी निगाहों में, आपके अपनेपन और स्नेहभरी आकांक्षाओं में मुखरित हो रहा है… पल्लवित हो रहा है… छोटा सा बिरवा… छोटा सा पौधा… वटवृक्ष बनकर आपके अरमानों की छाया बनकर डटा हुआ है… कोई आपके अरमानों को रौंदने आता है तो अग्निबाण आग उगलने लगता है… कोई आपके शहर को क्षति पहुंचाए तो अग्निबाण प्रहार करता है… हम गर्व से कहते हैं कि हम कागज पर आग परोसते हैं… अहंकारों के विध्वंस और सौहार्दता के रक्षक बनकर अग्निबाण अपने सफर की डगर पर चला है और यदि यह साहस हमें मिला है तो आपके प्यार और विश्वास के बूते पर… उंगली पकडक़र चलना इस शहर ने सिखाया… अदने से कद को पाठकों के विश्वास ने बढ़ाया… आज से 49 वर्ष पूर्व सैकड़े की संख्या में छपने वाला अखबार आज लाखों प्रतियों का प्रसार पार कर अनगिनत आंखों का नूर बन चुका है… खबरों की धडक़न बनकर आपकी चाहत का मुंतजिर बना अग्निबाण आज अपने सपनों के इस मुहाने पर आपका आभार व्यक्त करता है… कलम का यह सफर जारी रहेगा… खबरों की निष्पक्षता, विचारों की निर्भीकता और आचरण की निडरता का संकल्प हम पूरा करेंगे और अपने पथ प्रदर्शक, हमारे आदर्श, हमारे प्रणेता अग्निबाण के जन्मदाता, हमारे बाबूजी के संकल्पों को साकार करेंगे…
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