
नई दिल्ली । सोनम वांगचुक(Sonam Wangchuk) को जंतर मंतर(Jantar Mantar) से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ नया घटनाक्रम अब अभिजीत दीपके(Abhijit Deepke) के अनिश्चितकालीन अनशन तक पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी(Cockroach Janata Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और आंदोलन के समर्थन का प्रतीक बताया है लेकिन इस फैसले के साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ी वजह यह है कि खुद दीपके पहले कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें माइग्रेन की समस्या है और लंबे समय तक खाली पेट रहने पर उनकी तबीयत बिगड़ सकती है।
दरअसल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह सवाल लगातार उठ रहा था कि जब सोनम वांगचुक लंबे समय से अनशन पर बैठे हैं तब आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके खुद अनशन क्यों नहीं कर रहे। इस सवाल का जवाब देते हुए दीपके ने पहले कहा था कि आंदोलन की पूरी रणनीति और प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है इसलिए उनका सक्रिय रहना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि सोनम वांगचुक ने स्वयं उन्हें अनशन पर बैठने से मना किया था ताकि आंदोलन का संचालन प्रभावित न हो।
इसके अलावा अभिजीत दीपके ने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या का भी खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि उन्हें माइग्रेन की शिकायत है और यदि समय पर भोजन नहीं मिलता तो तेज सिरदर्द शुरू हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार के लोग हमेशा उन्हें समय पर खाना खाने की सलाह देते हैं क्योंकि अधिक देर तक भूखे रहने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। चिकित्सकीय दृष्टि से भी माइग्रेन के मरीजों के लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि इससे सिरदर्द का तीव्र दौरा पड़ सकता है और शारीरिक कमजोरी भी बढ़ सकती है।
ऐसे में अब जब अभिजीत दीपके ने खुद अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है तो उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा तो दूसरी ओर आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। किसी भी बड़े आंदोलन में नेतृत्व की भूमिका केवल मंच तक सीमित नहीं होती बल्कि रणनीति बनाना कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना प्रशासन के साथ संवाद करना और हर स्थिति पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी होता है। यह सब कार्य लगातार ऊर्जा और मानसिक एकाग्रता की मांग करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अनशन लंबा खिंचता है तो अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आंदोलन की गति और नेतृत्व दोनों प्रभावित होने की आशंका रहेगी। दूसरी ओर उनके समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया साहसिक कदम बता रहे हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अभिजीत दीपके अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद इस अनिश्चितकालीन अनशन को कितने समय तक जारी रख पाते हैं। आने वाले दिनों में उनका स्वास्थ्य और आंदोलन दोनों ही चर्चा का प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।
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