मंदसौर। जिले के बादाखेड़ी गांव (Badakhedi village) में संचालित एक शैक्षणिक संस्थान को लेकर जांच के दौरान गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग (Madhya Pradesh Child Protection Commission) के निरीक्षण में (Illegal Madrassa) स्कूल संचालन, छात्र रिकॉर्ड और हॉस्टल व्यवस्था से जुड़ी कई विसंगतियां सामने आने के बाद शिक्षा विभाग को कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
जानकारी के अनुसार, आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा अपने तीन दिवसीय मंदसौर दौरे के दौरान अचानक बादाखेड़ी गांव स्थित एक संस्थान के निरीक्षण के लिए पहुंचीं। जांच के दौरान आरोप सामने आया कि स्कूल के नाम पर कथित रूप से मदरसा और हॉस्टल संचालित किया जा रहा था।
निरीक्षण में आयोग को संस्थान में मौजूद छात्राओं की संख्या और उपलब्ध रिकॉर्ड में अंतर मिला। मौके पर 100 से अधिक बच्चियों का सामान मिलने की बात कही गई, जबकि रिकॉर्ड में छात्राओं की संख्या अलग-अलग बताई गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजों और पोर्टल पर दर्ज जानकारी में भी असंगतियां पाई गईं।
जांच में यह भी सामने आया कि संस्थान को कथित तौर पर केवल छठी से आठवीं कक्षा तक संचालन की अनुमति थी, लेकिन परिसर से प्राथमिक स्तर से लेकर 12वीं कक्षा तक की किताबें मिलने का दावा किया गया। इसके अलावा, संस्थान की मान्यता छात्र और छात्राओं दोनों के लिए होने के बावजूद केवल छात्राओं को पढ़ाए जाने का मुद्दा भी जांच के दायरे में आया है।
आयोग की अध्यक्ष ने शिक्षा विभाग को मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई, जिसमें एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा भी शामिल है, करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिंज ने कहा कि निरीक्षण के दौरान कई नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि बिना अनुमति हॉस्टल संचालन और विभाग को सूचना दिए बिना गतिविधियां चलाए जाने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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