
नई दिल्ली । सीजेपी (CJP) के नेताओं को विदेश (Foreign) से फंडिंग मिलने के आरोपों ने राजनीतिक विवाद (Political Controversy) को और तेज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) की ओर से लगाए गए आरोपों पर सीजेपी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संगठन के नेताओं को विदेशी स्रोतों से पैसा मिल रहा था, तो केंद्रीय मंत्री उस समय उनके साथ संपर्क में क्यों थे? रांका ने कहा कि जितेंद्र सिंह को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे उनसे मुलाकात क्यों कर रहे थे और बातचीत के दौरान साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों करते थे।
रांका ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश में कई गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन सरकार के मंत्री उन पर जवाब देने के बजाय बार-बार विदेशी फंडिंग का मुद्दा उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से फंडिंग मिलने के आरोपों को लगातार दोहराया जा रहा है, जबकि देश के सामने मौजूद समस्याओं पर चर्चा नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सीजेपी का आंदोलन शुरू होने के समय भी संगठन पर आरोप लगाया गया था कि उसके 95 प्रतिशत खाते पाकिस्तान से संचालित हो रहे हैं। रांका ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे आरोपों के जरिए एक पुराना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास देश की मौजूदा समस्याओं का जवाब नहीं है और इसलिए बार-बार विदेशी फंडिंग का मुद्दा सामने लाया जाता है।
रांका ने देश में कथित वोट चोरी, चुनावी प्रक्रिया और बेरोजगारी जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि इन मामलों पर सरकार जवाब क्यों नहीं देती। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाया और पूछा कि सरकार उन्हें बचाने की कोशिश क्यों कर रही है। इसके अलावा उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं और युवाओं के सामने मौजूद रोजगार संबंधी चुनौतियों पर भी जवाब मांगा।
रांका ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि सीजेपी को विदेशी फंडिंग मिल रही थी, तो मंत्री उनके साथ बैठकें क्यों कर रहे थे और बातचीत के दौरान चाय-नाश्ता क्यों साझा कर रहे थे। उनके अनुसार, इन सवालों का जवाब मंत्री को देना चाहिए।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका को विदेशी स्रोतों से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि दीपके को अमेरिका से और रांका को पाकिस्तान से पैसा मिला है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि पाकिस्तान के नेताओं सहित भारत विरोधी संगठन और विदेश से वित्तपोषित समूह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को आर्थिक सहायता दे रहे हैं। उन्होंने खुद को कार्यकर्ता बताने वाले कुछ लोगों पर झूठा नैरेटिव तैयार करने का आरोप भी लगाया था।
इन आरोपों पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि सौरव को कहां से फंडिंग मिल रही है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने जितेंद्र सिंह पर सवाल उठाते हुए पूछा कि धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटवाने के लिए कथित विदेशी फंडिंग में से उन्होंने कितना कमीशन लिया। दीपके ने बातचीत की मेज पर जितेंद्र सिंह की मौजूदगी का भी उल्लेख किया।
इस विवाद में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि सीजेपी के कार्यकर्ताओं ने विदेशी संगठनों से पैसा मिलने के बजाय भाजपा से चुनावी बॉन्ड के माध्यम से फंड मिलने की बात कही है। मोइत्रा के मुताबिक, आशुतोष रांका, सौरव और संगठन के अन्य सदस्यों ने भाजपा से फंड मिलने की बात स्वीकार की है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सीजेपी को पैसा भाजपा ही दे रही है।
इस तरह विदेशी फंडिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कई राजनीतिक सवालों और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों तक पहुंच गया है। हालांकि, इन बयानों में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
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